
Fish contain piracy drill
बीसलपुर बांध के जलभराव क्षेत्र में मछलियों के अवैध तरीके से किए जाने वाले शिकार व मछली चोरी पर अंकुश लगाने की मत्स्य विभाग कवायद शुरू कर दी है। इसके चलते मछली ठेकेदार की नावों को भी पानी से बाहर निकलवा दिया है।
ठेकेदार कार्मिकों को परिचय-पत्र, लाइसेंस, नाव उतारने का पास आदि बनवाने को कहा गया है। मछली के शिकार में काम ली जाने वाली नावों पर नियमानुसार रंग, पंजीयन क्रमांक आदि लिखवाने की हिदायत दी गई है।
इसके चलते बांध में एक सप्ताह से मछली पकडऩे का कार्य बंद है। बांध के पानी में दौडऩे वाली नाव, मोटर बोट आदि बांध किनारे ही खड़ी है।
सुरक्षा के साथ चोरी पर शिकंजा
राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल, झारखण्ड आदि राज्यों के सैकड़ों लोग हर साल बांध में मछली पकडऩे का कार्य करने आते हैं। इससे काफी लम्बे क्षेत्र में फैले बीसलपुर बांध के जलभराव में मछ़ुआरों के साथ होने वाले हादसों में मृतकों का पता नहीं लग पाता था।
परिचय-पत्र मिलने व रजिस्ट्रेशन के बाद ऐसी घटनाओं पर रोक लग सकती है। केवल दक्ष शिकारी ही पानी में जा सकेंगे। बांध में दौडऩे वाली अवैध नावों से होती मछली चोरी पर भी अंकुश लगने की सम्भावना है।
कराना होगा चरित्र सत्यापन
अन्य राज्यों व स्थानीय सहित करीब 400 लोग बांध में मछली पकडऩे का काम करते हैं। अब इन सभी लोगों को पुलिस से चरित्र का सत्यापन भी कराना होगा। इससे बांध में मछली पकडऩे वाले अवैध गतिविधियों को अंजाम नहीं दे सकेंगे।
परेशानी कम होगी
मछली चोरी पर शिकंजा कसने के साथ ही बांध में शिकारियों पर नजर बनाए रखने के लिए ये सभी तैयारी की जा रही है। इससे विभाग की ही नहीं पुलिस व प्रशासन की परेशानी भी कम होगी।
जगदीश रायजादा,
मत्स्य विकास अधिकारी टोंक।
बड़ी खबरें
View Allट्रेंडिंग
