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पंचदिवसीय ज्योति पर्व का धनतेरस से शुभारंभ

कार्तिक मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी 9 नवम्बर से धनतेरस के साथ पंाच दिवसीय दीपोत्सव पर्व प्रारंभ हो जाएगा। यह दिन खरीदारी के लिए शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन घर में नई चीज लाने से सुख समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है।

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aniket soni

Nov 09, 2015

कार्तिक मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी 9 नवम्बर से धनतेरस के साथ पंाच दिवसीय दीपोत्सव पर्व प्रारंभ हो जाएगा। यह दिन खरीदारी के लिए शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन घर में नई चीज लाने से सुख समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है।

धनतेरस का धार्मिक महत्व

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धन्वतंरी भगवान समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धनवंतरी को आयुर्वेद का जनक माना जाता है। इस दिन दुकानों में धनवंतरी की पूजा की जाती है।

इस दिन महिलाओं के द्वारा घर की सुख समृद्धि के लिए मंदिरों में 13 पत्तल मिष्ठानों से संकल्पित करके दान करती है। इसकी शुरुआत धर्मराज जी के मंदिर से प्रारंभ करके दान दी जाती है। घरों के बाहर शाम को दीपक जलाया जाता है।

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खरीदारी का मुहूर्त

पंडित यज्ञदत्त शर्मा ने बताया कि इस दिन बही खातों की खरीदारी, बही खातों का मुहूर्त, प्रतिष्ठान मुहूर्त व भगवान धनवंतरी के पूजन का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है।

प्रात:6.46 से 7.30 बजे तक अमृत का चौघडिया
प्रात: 7.30 बजे से 9 बजे तक राहुकाल होने की वजह से समय वर्जित है।
प्रात: 9.28 बजे से 10.50 बजे तक शुभ का चौघडिया।
प्रात: 11.40 बजे से 12.50 बजे तक अभिजित मुहूर्त समय।
दोपहर : 1.32 बजे से 5.35 तक चर, लाभ व अमृत का चौघडिया।
शाम : 5.35 बजे से 7 बजे तक पुन: चर का चौघडिया।
रात्रि :10 से 11 .30 बजे तक पुन: लाभ का चौघडिया।