
जयपुर। रेलवे की ओर से प्रदेश के जयपुर सहित छह स्टेशनों पर शोपिंग मॉल, जिम सहित आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। रिडवलपमेंट स्कीम के तहत यह कार्य शुरू भी कर दिया गया है। जयपुर जक्शन पर ही इस कार्य में 750 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। ऐसे में जाहिर है यहां पर यात्रियों के साथ खरीददारी करने वालों की भी संख्या बढ़ेगी। लेकिन यहां पर आने वाले यात्रियों और उनके सामान की सुरक्षा का कोई बंदोबस्त नहीं है। आरपीएफ के पास यात्रियों की सुरक्षा का पावर नहीं है। वहीं जीआरपी नफरी और संशाधनों के अभाव में हाफ रहीं है।
बिना टिकट हर कोई आ सकेगा स्टेशन
शोपिंग मॉल, जिम सहित अन्य सुविधाओं का विस्तार होने पर स्टेशन पर आने वालों को किसी तरह का टिकट नहीं लेना पड़ेगा। इसके लिए रेलवे ने कार्य को आगे भी बढ़ा दिया है। रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन (आरई) सहित अन्य सभी विभागों को जगतपुरा शिफ्ट कर दिया गया है। इसके अलावा मेट्रो स्टेशन से सीधे जयपुर स्टेशन पर एंट्री के लिए स्काई वॉक-वे का भी काम शुरू हो गया है।
खाने स्टॉल् और रेस्टोरेंट खुलेंगे
योजना के तहत स्टेशन के फर्स्ट फ्लोर पर जिम और शॉपिंग मॉल होगा। यहां बाहरी व्यक्ति आकर खरीदारी कर सकता है। जयपुर शहर के प्रमुख खानपान स्टॉल्स और रेस्टोरेंट भी यहां पर खोले जाएंगे। इन्हें साउंडप्रूफ भी बनाया जाएगा। इसका प्रवेश बाहर से होगा, यानी प्लेटफॉर्म में बिना प्रवेश किए, यहां जा सकेंगे।
रिजर्वेशन हॉल होगा अपग्रेड
जयपुर जंक्शन के रिडेवलपमेंट के तहत प्लेटफॉर्म नंबर 7/8 (सीकर) के पास बना पार्सल ऑफिस हसनपुरा की तरफ शिफ्ट किया जाएगा। सैकंड एंट्री पर तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। यात्रियों को ट्रेनों से सामान भेजने के लिए सेकेंड एंट्री पर जाना होगा। इन दोनों के शिफ्ट होने से डीआरएम ऑफिस के सामने जगह खाली हो जाएगी। वहीं, प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर बना फूड प्लाजा और जन आहार भी यहां से शिफ्ट कर दिया जाएगा। स्टेशन की एंट्री पर बने रिजर्वेशन और बुकिंग हॉल को भी अपग्रेड किया जाएगा।
मुख्य गेट पर बनेंगी अंडरग्राउंड पार्किंग
रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार पर बने इंजन पार्क की जगह अंडरग्राउंड पार्किंग विकसित की जाएगी। इसमें 10 हजार वाहन पार्क करने की क्षमता होगी।
सुरक्षा का नहीं रखा ध्यान
रेलने ने यात्रियों की सुविधा और आय बढ़ाने का तो योजना में ध्यान रखा है। लेकिन यहां आने वाली भीड़ की सुरक्षा कैसे होगी। इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं रखा गया है। वजह है कि वर्तमान में रेलवे की सुरक्षा का दायित्व आरपीएफ और जीआरपी के पास है। आरपीएफ के पास केवल रेलवे एक्ट के तहत कार्रवाई करने का अधिकार है। लेकिन यात्रियों की सुरक्षा के जुड़े अधिकारी जीआरपी के पास है।अभी तक आरपीएफ के पास यात्रियों से सुरक्षा से जुड़ी पॉवर नगण्य है।
रेलवे सुरक्षा में ऐसे शामिल हुई जीआरपी
1853 में पहली बार मुंबई से ठाणे के बीच रेल चलाई गई। दो साल बाद ही ट्रेनों में चोरी की घटनाएं बढ़ने लगीं। पहले कंपनियां रेलवे को चलाती थीं। तो उन्होंने वाच एंड वार्ड यानी चौकीदार (आज आरपीएफ) रखे थे। वॉच एंड वार्ड चोरों को पकड़ लेते थे पर कार्रवाई का अधिकार उनके पास नहीं होता था। इसके लिए उन्होंने राज्यों से उनकी मदद करने की अपील की। तो तय हुआ कि आधा वेतन रेलवे देगा। इसके बाद से रेल सुरक्षा में जीआरपी शामिल हो गई।
जीआरपी राज्य सरकार आरपीएफ केंद्र अधीन
रेलवे संपत्ति और यात्रियों की सुरक्षा के लिए स्टेशन पर आरपीएफ और जीआरपी की चौकी और थाने बने हुए है। आरपीएफ केंद्र से संबंधित है। जीआरपी राज्यों के अधीन है। आरपीएफ की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है। जीआरपी का वेतन राज्य और केंद्र संयुक्त रूप से देते हैं। आरपीएफ को रेल संपत्ति की सुरक्षा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर एक्शन का अधिकार है। जीआरपी के पास आईपीसी और सीआरपीसी के तहत कार्रवाई का अधिकार है।
Published on:
15 Feb 2023 03:44 pm
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