
कम कीमत पर भी दूध बेचने को हो रहे मजबूर
कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए घोषित लॉक डाउन का असर दुग्ध व्यवसाय पर पड़ रहा है। गांवों से शहरी क्षेत्र में होने वाली आपूर्ति में कमी पशुपालक किसानों की आमदनी को प्रभावित कर रही है लेकिन यह हाल पूरे राज्य के पशुपालकों का है। आपको बता दें कि दूधियों ने अब दूध की खरीद कम कर दी है, एेसे में पशुपालक दूध को घी बनाने और पीने के काम में ले रहे हैं जबकि पहले दूध की बिक्री कर पशुओं के लिए खल व चूरी सहित अन्य आवश्यक कार्य के लिए राशि का उपयोग किया जाता है। आइए जानते हैं राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में क्या है दुग्ध व्यवसाय के हालात।
सबसे पहले बात करते हैं जजावर कस्बे की। कस्बे सहित आसपास के क्षेत्र से पहले करीब ढाई से तीन हजार लीटर दूध की प्रतिदिन सप्लाई होती है, जो अब घटकर आधी रह गई है। डेयरी संचालक राम लाल गुर्जर व देवीशंकर सैनी ने बताया कि लॉकडाउन से पहले पशुपालकों को फैट के हिसाब से चालीस से पैतालीस रुपये प्रति लीटर के हिसाब से मिल जाते थे, लेकिन अभी बिक्री घटी तो दाम भी घट गए हैं। अभी वर्तमान में फैट के हिसाब से 30 से चालीस रुपए प्रति लीटर दूध का दिया जा रहा है। हालांकि लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में दूध की किल्लत नजर नहीं आई। अधिकतर क्षेत्रों में दूध की आपूर्ति बनी रही लेकिन अब दुकानों के बंद रहने से दूध की खपत में कमी आई है।
पशुपालकों का कहना है कि वाहनों का आवागमन नहीं होने के कारण पशुचारा की कीमत कई गुना तक बढ़ गई है, जबकि दूध का बढिय़ा रेट नहीं मिल रहा है। सबसे अधिक उन पशुपालकों को परेशानी है जो शहर में आकर हलवाई मिष्ठान की दुकानों में हर रोज दूध बेचते थे। दुकान बंद रहने से दूध की बिक्री प्रभावित हो गई है। बाजार बंद होने से पशुआहार लेने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
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अब बात करते हैं झालरापाटन की, जहां परेशानियों के बीच भी दूधिए अपनी सेवाएं जारी रखे हुए हैं। बस बंद हो जाने के कारण वह बाइक से दूध लेकर आते हैं। झालरापाटन तहसील के गांव रुंडनाव निवासी दूधिया रघुराज सिंह राजपूत का कहना है कि वह रोजाना गांव से बाइक पर दूध लेकर झालरापाटन देने के लिए आता है। रास्ते में उसे पुलिस के अलावा अन्य कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन वह बिना नागा दूध देने आ रहा है। इसी तरह रायपुर मुंण्डला गांव से रोजाना रायपुर दूध लेकर आने वाले सुजान सिंह गुर्जर का कहना है कि उन्हें अभी कठिन परिस्थिति में दूध लेकर आना पड़ रहा है। ग्राहक को सेवा देने के लिए अधिक खर्च आने के बावजूद वह नियमित रूप से सेवा भाव से दूध ला रहे हैं।
कोटा जिले के छबड़ा में डेयरी संचालकों ने दूध वितरण का समय बढ़ाए जाने की मांग की है। डेयरी संचालकों का कहना है कि प्रशासन ने सुबह ७ से १२ बजे तक समय निर्धारित किया है जिसके कारण दूध सप्लाई में कमी आई है। पहले ८ क्विंटल तक सप्लाई होती थी जो अब २ क्विंटल ही रह गई है। दूध विक्रेता लड्डू गुर्जर का कहना है कि गांव से छबड़ा आने में एक से डेढ़ घंटा लगता है। प्रशासन ने दूध सप्लाई का समय भी निर्धारित किया हुआ है लेकिन घर घर जाकर सप्लाई के लिए अधिक समय की जरूरत है।
केलवाड़ा की बात करें तो यहां की समस्या भी कुछ एेसी ही है। दूध बेचने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। अब गली गली जाकर दूध बेचना पड़ रहा है साथ ही दूध स्टोर करने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। दूध सप्लाई के बाद जब फ्री होते हैं तब तक बाजार बंद हो जाता है एेसे में पशुओं के आहार के लिए चारा नहीं मिल पाता। सुबह भी पहले की अपेक्षा जल्दी उठना पड़ता है। लॉकडाउन के चलते समय पर दूध की एवज में पैसा भी नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र के अधिकांश लोग मजदूरी करने वाले हैं। मजदूरी नहीं मिल पाने के कारण उनके पास पैसा नहीं इसलिए वह दूधिए को पैसा नहीं दे पा रहे।
तो यह कहा जा सकता है कि लॉकडाउन ने इन दूधिओं की परेशानियों को भले ही बढ़ा दिया हो लेकिन इसके बाद भी वह सेवा भाव से अपना काम कर रहे हैं। हां इतना अवश्य है कि दूध की बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम हो गई है एेसे में सभी को इंतजार है कि जल्द ही हालात सामान्य होंगे और एक बार फिर वह पूर्व के दिनों की तरह अपना काम कर सकेंगे।
Published on:
14 Apr 2020 01:25 pm
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