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मिला न्याय, जारी हुआ आदेश, ठाकुरजी की हुई जमीन, सिद्धार्थ महाजन ने जारी किए आदेश

भगवान (ठाकुरजी) की जमीन हड़पने के मामले में राज्य सरकार बैकफुट पर आ गई है। कलक्टर ने जलमहल के सामने स्थित पांचसितारा होटल का लीज नवीनीकरण और होटल के प

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जयपुर

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Rajesh

Sep 13, 2017

Siddharth Mahajan

जयपुर

भगवान (ठाकुरजी) की जमीन हड़पने के मामले में राज्य सरकार बैकफुट पर आ गई है। कलक्टर ने जलमहल के सामने स्थित पांचसितारा होटल का लीज नवीनीकरण और होटल के पक्ष में की गई लीज डीड वापस लेने के आदेश दे दिया है।
कलक्टर सिद्धार्थ महाजन ने 3 दिन पहले यह बड़ा आदेश जारी किया। इसके तहत 5 बीघा 12 बिस्वा भूमि पहले की तरह मंदिर मूर्ति ठाकुरजी श्रीकल्याणजी के नाम दर्ज होगी। इस आदेश से पूरी तरह साफ है कि असंवैधानिक तरीके से मंदिर की भूमि का लीज नवीनीकरण और नामांतरण खोलने का कैसे खेल रचा था। मामले में राजस्व मंत्री अमराराम चौधरी ने राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को राजस्व रिकॉर्ड में पूर्ववत मंदिर मूर्ति ठाकुरजी श्रीकल्याणजी के नाम दर्ज करने के आदेश दिए थे। नौकरशाह आदेश दबाए रहे।

अब होटल संचालन प्रभावित होने की स्थिति खड़ी हो गई है


गौरतलब है कि तत्कालीन कलक्टर कृष्ण कुणाल के समय होटल को फायदा पहुंचाने के लिए मंदिर की जमीन की लीज डीड इण्डस होटल्स कॉर्पोरेशन के नाम जारी कर दी गई थी। यहां होटल ट्राइडेंट चल रहा है। जमीन की मौजूदा बाजार कीमत 250 करोड़ रुपए से ज्यादा है।

यूं चला खेल
लीज अवधि समाप्त होने पर जमीन पुन: मंदिर कल्याणजी के नाम दर्ज होनी चाहिए थी लेकिन ऐसा करने की
बजाय नौकरशाहों ने गली निकाल ली। तहसीलदार ने रिपोर्ट सौंपी, जिसमें केवल मौके पर होटल निर्माण होने की जानकारी दी गई। शेष तथ्य अंकित नहीं किए गए। इसी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए तत्कालीन कलक्टर कृष्णा कुणाल ने होटल की लीज अवधि बढ़ाकर नामांतरण खोलने के आदेश भी दे दिए।

न्यायालय राजस्व मंत्री ने यह माना
न्यायालय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राजस्व ने माना कि मंदिर मूर्ति शाश्वत नाबालिग होते हैं, जिन पर पुजारी या अन्य किसी को भी खातेदारी अधिकार अर्जित नहीं होते। मंदिर मूर्ति की भूमि को किसी के भी पक्ष में समर्पित नहीं किया जा सकता। न ही मंदिर मूर्ति की भूमि की किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में लीजडीड की जा सकती है।

कलक्टर के आदेश की जानकारी मिली, प्रति प्राप्त नहीं हुई है। इसका अध्ययन करने के बाद अलग से कानूनी प्रक्रिया अपनाने पर निर्णय होगा। हाईकोर्ट में मामला लंबित है। कलक्टर के आदेश की जानकारी प्रबंधन को भेजी जा रही है।


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