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एक मई से नौ शहरों में 35-44 आयुवर्ग के लोगों को ही लगेगी वैक्सीन

- सीरम इंस्टीट्यूट सिर्फ तीन लाख डोज देने को तैयार- बाकी लाभार्थियों को और वैक्सीन मिलने पर ही लग पाएगी - एक मई से 18 से 45 साल के लोगों को लगनी थी वैक्सीन

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जयपुर

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Tasneem Khan

Apr 30, 2021

vaccinated

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Jaipur अब एक मई से 18 से 45 आयु वर्ग के लोगों के लिए वैक्सीनेशन शुरू नहीं किया जा सकेगा। इस आयु वर्ग के वैक्सीनेशन के लिए जरूरी संख्या में वैक्सीन की डोज राज्य को नहीं मिल पा रही। इसलिए एक मई इसे इन लाभार्थियों का वैक्सीनेशन शुरू नहीं हो पाएगा। वैक्सीन बनाने वाली कम्पनी सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया ने राजस्थान को केवल तीन लाख संभावित डोज देने की बात कही है। ऐसे में पूरे प्रदेश में 18-45 आयुवर्ग के लिए लोगों के लिए वैक्सीनेशन प्रोग्राम प्रारंभ नहीं किया जा सकेगा।

अभी सिर्फ 35 से 44 आयुवर्ग का टीकाकरण
इस बारे में राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जो संभावित तीन लाख वैक्सीन की डोज मिलने जा रही हैं, उनका उपयोग प्रदेश के उन शहरों में सर्वप्रथम किया जाएगा, जहां संक्रमण अधिक है। इन शहरों में भी केवल 35-44 आयुवर्ग के लोगों का ही वैक्सीनेशन होगा। इसके बाद जब वैक्सीन की सप्लाई नियमित होगी तब तय आयुवर्ग के लोगों का वैक्सीनेशन होगा। प्रदेश में 18-45 वर्ष आयुवर्ग के करीब 3.25 करोड़ लोग है। इसलिए प्रदेश को 7 करोड़ वैक्सीन डोज की आवश्यकता है। केंद्र सरकार से पर्याप्त वैक्सीन मिलने के साथ ही प्रदेश में वैक्सीनेशन का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।

7 लाख इंजेक्शन प्रतिदिन लगाने का तंत्र विकसित
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वर्तमान में 7 लाख इंजेक्शन प्रतिदिन लगाने का तंत्र विकसित किया जा चुका है, जिसे और भी बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विभाग ने 5 लाख 80 हजार वैक्सीन एक दिन में लगाए थे। राज्य में अभी 45 से अधिक उम्र के लोग करीब 2 करोड़ 9 लाख हैं। इनमें से भी कई लोगों को दूसरा डोज लगाना बाकी है।

15 हजार रेमडेसिविर प्रतिदिन की जरूरत
चिकित्सा मंत्री का कहना है कि कोरोना संक्रमितों की तेजी से बढ़ती संख्या के कारण प्रदेश को एक मई से 15 हजार रेमडेसिविर इंजेक्शन प्रतिदिन चाहिए। जबकि केन्द्र सरकार की ओर से जो आवंटन किया जा रहा है वह बेहद कम है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में अस्पतालों या कोविड केयर सेंटर में पर्याप्त संख्या में बैड्स उपलब्ध हैं, लेकिन ऑक्सीजन और रेमडेसिविर का आवंटन केन्द्र सरकार के हाथ में होने के कारण चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।