शहर की सड़कों पर बेतरतीब तरीके से खड़े रहने वाले रेहड़ी ठेले, चाय की थडिय़ों से लोगों को हो रही परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद नजर आने लगी है। रेहड़ी-ठेले व चाय-पान की थडिय़ों से शहर अतिक्रमण की चपेट में आ चुका है। इसके लिए प्रशासन बार-बार कार्रवाई भी कर चुका है। लेकिन नतीजा सिफर रहा है। रेहड़ी-ठेले व फुटपाथ पर सामान बेचने वालों की वजह से आए दिन छोटे-मोटे हादसे भी बढ़ रहे हैं। अतिक्रमण के चलते शहर की सड़कें सिकुड़ कर रह गई हैं। जनता और वाहन चालकों को राहत दिलाने के मकसद ने नगर परिषद अब इस प्रकार के व्यापारियों के लिए अलग से मार्केट बनाएगी। यह मार्केट राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत बनाया जाएगा।
रेहड़ी-ठेले वालों का होगा सर्वे
रेहड़ी-ठेले व फुटपाथ पर सामान बेचने वालों का मार्केट तैयार करने के लिए सर्वे करने का काम शुरू होगा। एक महीने में सर्वे का काम पूरा होने के बाद मार्केट बनाने के स्थान का चयन किया जाएगा।
कंसलटेंट कंपनी को सौंपा काम
विक्रेताओं का सर्वे करने के लिए नगर परिषद की ओर से जयपुर की कंसनलटेंट कंपनी को ठेका दिया गया है। यह कंपनी एक महीने में सर्वे का काम पूरा करेगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
एक हजार से अधिक हैं रेहड़ी-ठेले
झुंझुनूं शहर में रेहड़ी-ठेले और चाय-पान की थडिय़ों के अलावा फुटपाथ पर सामान बेचने वालों की बड़ी संख्या है। शहर में प्रारंभिक सर्वे के अनुसार एक हजार से अधिक रेहड़ी-ठेले हैं। इसके अलावा चाय-पान की थडिय़ों समेत अन्य अस्थाई दुकानें संचालित हैं। फुटपाथ पर भी सैकड़ों लोग सामान बेचकर अपना जीवन बसर कर रहे हैं।
इन स्थानों की है खराब स्थिति
शहर में अव्यवस्थित तरीके से रेहड़ी ठेले लगाने की वजह से आमजन के साथ-साथ वाहन चालक और स्थाई दुकानदार सभी परेशान रहते हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति ताल-बाजार, नेहरू मार्केट, सब्जी मंडी, रोडनंबर एक, चूणा चौक, मंडावा मोड़, गुढ़ा मोड़, पंचदेव मंदिर, पीपली चौक, रेलवे स्टेशन आदि स्थानों की रहती है। यहां पर आमजन को पैर रखने के लिए जगह नहीं मिलती।
विक्रेताओं को मिलेगा लाइसेंस
सर्वे पूरा होने के बाद शहर में लगे रेहड़ी-ठेले, अस्थाई दुकानें, चाय-पान की थडिय़ां, फुटपाथ पर बैठकर सामान बेचने वाले लोगों के लिए लाइसेंस जारी किया जाएगा। इन्हें लाइसेंस जारी किया जाएगा और बाकयदा ठेले का नंबर होगा।
अब हमारे शहर में रेहड़ी-ठेले समेत अन्य पथ विक्रेताओं का अपना मार्केट होगा। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत नगर परिषद इसे विकसित करेगा। इसके लिए जयपुर की कंसलटेंट कंपनी को ठेका दिया जा चुका है। एक महीने में कंपनी सर्वे पूरा करेगी। सर्वे के बाद विक्रेताओं को लाइसेंस जारी किया जाएगा।
प्रमोद सोनी, प्रभारी राष्ट्रीय आजीविका मिशन, झुंझुनूं