2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

खान विभाग में मिलीभगत का खेल, 73 खानों की बिना पर्यावरण एनओसी कर दी लीज ट्रांसफर

प्रदेश में करीब दस साल से वनभूमि में चल रही खानों की लीज ट्रांसफर का खेल चल रहा है। जबकि केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय के एनओसी बिना लीजों का ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। बड़ी बात यह है कि इन खानों के मामले में विभाग दो तरह की रणनीती पर काम कर रहा है। विभाग ने हाइकोर्ट के आदेश भी दरकिनार कर दिए।

2 min read
Google source verification
खान विभाग में मिलीभगत का खेल, 73 खानों की बिना पर्यावरण एनओसी कर दी लीज ट्रांसफर

खान विभाग में मिलीभगत का खेल, 73 खानों की बिना पर्यावरण एनओसी कर दी लीज ट्रांसफर

जयपुर।
खान विभाग में अपनों पर मेहरबानी का खेल खूब चल रहा है। एक ही तरह के मामलों में विभाग की अलग-अलग कार्रवाई विभाग की मंशा पर ही सवाल खड़े कर रही है। स्पष्ट नियम है कि वन भूमि पर चलने वाली खान की यदि लीज ट्रांसफर की जाती है तो केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी लेना जरूरी है। प्रदेश में गत दस वर्षों में करीब 74 मामले एेसे सामने आ चुके हैं, जिनमें लीज का ट्रांसफर केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी के बिना कर दिया गया। अपनों पर मेहरबानी के खेल का खुलासा तब हुआ जब इस तरह के प्रकरण में एक खान के पहले किए लीज ट्रांसफर को विभाग ने निरस्त कर दिया। लेकिन शेष 73 खानें आज भी उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और करौली जिले में चल रही हैं।

अपनों पर मेहरबानी और दूसरों पर गाज गिराने वाला मामला तब सामने आया जब अधिकारियों ने अनबन के चलते करीब 9 साल पहले एक लीज ट्रांसपर इस ग्राउण्ड पर निरस्त दी कि लीज ट्रांसफर से पहले केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी नहीं ली गई। यह कार्यवाही अन्य खानों पर नहीं किए जाने से जिसकी लीज निरस्त की गई उस लाइसेंसी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने 9 अप्रेल 2020 को दिए फैसले में विभागीय कार्यवाही को सही माना। एेसे में विभाग को शेष 73 चल रही खानों पर कार्यवाही करनी थी। लेकिन नहीं की गई।

इस मामले की शिकायत के बाद अब खान एवं पेट्रोलियम विभाग की शासन उप सचिव नीतू बारूपाल ने विभाग के निदेशक को एक नवंबर 2021 को पत्र जिम्मेदारी अधिकारियों को कार्यवाही के लिए लिखा। लेकिन इस पर अमल ही नहीं हुआ। अब फिर और 25 फरवरी 2022 को याददास्ती पत्र लिखा है। लेकिन जिलों के जिम्मेदार अधिकारियों ने मिली भगत के चलते उप सचिव के पत्र पर कार्यवाही को लेकर भी महत्व नहीं दिया। जबकि इन पत्रों में पत्रों में हाइकोर्ट के फैसले की पालना कराने को लेकर भी जिक्र किया गया है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी हाइकोर्ट के फैसले को भी मानने को तैयार नहीं हैं।

74 खानों की लीज ट्रांसफर वर्ष 2008 से 2021 के बीच की गई
मनन मार्बल प्रा. लि., मनोहरलाल शाह, शिवम नेचुरल, सोलंकी ग्रीन मार्बल प्रा. लि., रामापुरा मिनरल्स प्रा.लि., भैरवधाम मिनरल्स, शिवम मिनरल्स, राजपूताना एक्सपोर्ट, करणी मामा, बूका देवी, ऋषभ ग्रीन मार्बल प्रा.लि., एस प्यारी स्टोन, अमन अग्रवाल, सनलाइट मार्मो प्रा.लि., कृतिका राठौड़, वर्धमान माइनिंग प्रा.लि., अनिता रानी चौधरी, मोहित मार्बल इण्डस्ट्रीज, मैसर्स नीलकंठ मार्बल, वीरसुखा ग्रीन मार्बल, पीवीआर मिनरल्स, विनायक मार्बल, हरिप्रिया एन्टरप्राइजेज, वण्डर मार्बल सहित करीब 73 खानें हैं, जो जो बिना पर्यावरण एनओसी के लीज ट्रांसफर कर चलाई जा रही हैं।