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सिंजारे पर गजानंद को अर्पित की मेहंदी, कल मनेगा जन्मोत्सव

ganesh chaturthi 2020 : गणेश चतुर्थी का पर्व इस बार शनिवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व प्रथम पूज्य भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।    

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परकोटे वाले गणेशजी

परकोटे वाले गणेशजी के सजी मोदकों की झांकी।

जयपुर। गणेश चतुर्थी का पर्व इस बार शनिवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व प्रथम पूज्य भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। हर साल बड़े स्तर पर मनाया जाने वाला यह पर्व इस बार कोरोना काल के चलते सादगी के साथ घरों में ही मनाया जाएगा। शनिवार को गणपति बप्पा की घर-घर पूजा होगी। चतुर्थी के एक दिन पहले शहर के बड़े गणेश मंदिरों में सिंजारा महोत्सव मनाया जा रहा है। उत्सव के दर्शन भक्तों को ऑनलाइन या सोशल मीडिया के माध्यम से दर्शन करवाए जा रहे है।

चांदपोल दरवाजे के बाहर स्थित परकोटे वाले गणेशजी मंदिर में सिंजारा महोत्सव मनाया गया।
सुबह प.राहुल शर्मा के सान्निध्य में प्रथम पूज्य का अभिषेक कर गणेश जी महाराज को नवीन पोशाक धारण करवा कर फूल बंगले में विराजमान करवाया गया। मंदिर प्रवक्ता पंडित अमित शर्मा ने बताया सिंजारा महोत्सव के उपलक्ष्य में गणेशजी को मेहंदी अर्पित की गई और मोदकों की झांकी सजाई गई।


ब्रह्मपुरी स्थित नहर के गणेशजी मंदिर में गणपति का सिंजारा मनाया जा रहा है। शाम को गजानंद का विशेष शृंगार के बाद सुगंधित मेहंदी अर्पित की गई। इससे पहले राजशाही लहरिया पोशाक और साफा धारण करवाया गया। गजानन के मोदकों की झांकी सजाई गई।

सूरजपोल स्थित श्वेत सिद्धि विनायक मंदिर में बहुमूल्य रत्नों का हार धारण करवाया गया। कल विशेष पूजा होगी। चांदपोल परकोटा वाले गणेशजी मंदिर में आज नवीन पोशाक धारण करा मेहंदी अर्पण की जाएगी और मोदकों का भोग लगाया जाएगा।

गणपति पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेश शास्त्री के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी शुक्रवार रात्रि 11.03 से ही लग जाएगी और अगले दिन शनिवार रात्रि 7 बज कर 57 मिनट तक रहेगी। गणपति का जन्म मध्याह्न में होने से शास्त्रों में गणेश पूजन मध्याह्न में करना श्रेष्ठ माना गया है, जो 11 बजकर 12 मिनट से दोपहर एक बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इसमें भी दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से 1 बजकर 46 मिनट तक वृश्चिक लग्न में गणपति का पूजन करना सबसे श्रेष्ठ रहेगा। इसके अलावा जो लोग चौघडिय़ा में पूजा करना चाहते हैं उनके लिए उनके लिए श्रेष्ठ चौघडि़या शुभ का सुबह 7.42 से 9.18 बजे तक, चर-लाभ व अमृत के दोपहर 12.30 से शाम 5.18 बजे तक तक रहेंगे। इस दिन चंद्रदर्शन वर्जित माना गया है।