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Ganesh Chaturthi 2023: मोदकों के बीच विराजे मोती डूंगरी गणेशजी, धारण किया रत्न जड़ित मुकुट

Ganesh Chaturthi 2023: मोती डूंगरी गणेशजी मंदिर में गणेश चतुर्थी महोत्सव के तहत मोदकों की झांकी सजी। गजानन महाराज मोदकों के बीच विराजे नजर आए। गणेशजी को माणक व पन्ना जड़ित विशेष मुकुट धारण करवाया गया।

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Ganesh Chaturthi 2023: मोदकों के बीच विराजे मोती डूंगरी गणेशजी, धारण किया रत्न जड़ित मुकुट

Ganesh Chaturthi 2023: मोदकों के बीच विराजे मोती डूंगरी गणेशजी, धारण किया रत्न जड़ित मुकुट

जयपुर। मोती डूंगरी गणेशजी मंदिर में गणेश चतुर्थी महोत्सव के तहत आज मोदकों की झांकी सजी। गजानन महाराज मोदकों के बीच विराजे नजर आए। गणेशजी को माणक व पन्ना जड़ित विशेष मुकुट धारण करवाया गया। झांकी में 251 किलो के 2 मोदक और 200 किलो के दो मोदक मुख्य रहे। वहीं 5 मोदक 51 किलो के 5 मोदक और 21 किलो के 21 मोदक भी गणेशजी महाराज को अर्पित किए गए।

मंदिर महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि सुबह मंगला आरती के साथ ही मोदकों की झांकी के दर्शन खुले। भगवान गणेशजी महाराज को मोदक अर्पित किए गए। उन्हें फूलों के झरोखे में विराजमान किया। इसके साथ ही मंदिर में भक्तों की कतार लग गई। मंदिर परिसर गणेशजी महाराज के जयकारों से गूंज उठा। आज गजानन महाराज को बाहर का प्रसाद नहीं चढ़ाया जा रहा है। शाम 6.30 बजे से रात 9 बजे तक भक्तों को नि:शुल्क मोदक प्रसाद वितरण किया जाएगा।

भजन संध्या कल से शुरू
महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि भगवान गणपति को ध्रुपद गायन सबसे प्रिय है, इसी कारण 14 सितम्बर को ध्रुपद गायन से भजन संध्या शुरू होगी। भजन संध्या 14 से 17 सितंबर तक रोजाना शाम 7 बजे से रात 9 बजे तक होगी।

श्वेत सिद्धि विनायक के दुग्धाभिषेक
सूरजपोल बाजार स्थित श्वेत सिद्धि विनायक गणेशजी मंदिर में आज गणेशजी महाराज के दुग्धाभिषेक किया गया, इसके साथ ही शहनाई वादन व गणपति यज्ञ शुरू हुआ। सात दिवसीय गणपति महायज्ञ में 1008 व 108 मूंग की दाल के लड्डूओं का प्रयोग करवाया जा रहा है। मंदिर महंत मोहनलाल शर्मा ने बताया कि महोत्सव में 14 सितंबर को गन्ने के रस से गणपति का अभिषेक होगा। 15 सितंबर को गजानन महाराज को हीरे जवाहरात का नवरत्न मुकुट धारण करवाकर मोतीयों का शृंगार किया जाएगा। 16 सितंबर को लड्डुओं की झांकी सजाई जाएगी। 17 सितंबर को छप्पन भोग और 18 सितंबर केा सिंजारा महोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन गणेशजी महाराज को मेहंदी अर्पण की जाएगी। गणेश चतुर्थी पर दुग्धाभिषेक के बाद यज्ञ में लड्डूओं का प्रयोग किया जाएगा।