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Ganesh Tempale: देश में कहीं नहीं, सिर्फ जयपुर में है बिना सूंड वाले गणेशजी का मंदिर, यहां बाल रूप में हैं विराजमान

Ganesh Temple in Jaipur: जयपुर की नाहरगढ़ पहाड़ी पर स्थित करीब 290 साल पुराने गणेश मंदिर में बिना सूंड वाले बाल गणेश की अनोखी प्रतिमा विराजमान है। देश में संभवत: यह एकमात्र ऐसा मंदिर है। 365 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचने वाले भक्त यहां मनोकामना पूरी होने की आस्था रखते हैं।

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जयपुर

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Arvind Rao

May 13, 2026

Ganesh Temple in Jaipur Nahargarh Hill

जयपुर में नाहरगढ़ पहाड़ी पर स्थित 'गढ़ गणेश मंदिर' (पत्रिका फाइल फोटो)

Ganesh Temple Jaipur: राजधानी जयपुर अपनी विरासत और किलों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। लेकिन यहां एक ऐसा मंदिर भी है, जो पूरी दुनिया में बेजोड़ है। जयपुर की नाहरगढ़ पहाड़ी पर स्थित 'गढ़ गणेश मंदिर' में भगवान गणेश का एक ऐसा स्वरूप है, जिसे देखकर भक्त चकित रह जाते हैं। यहां गणपति बप्पा की बिना सूंड वाली प्रतिमा स्थापित है।

आमतौर पर गणेश जी की हर प्रतिमा में सूंड अनिवार्य रूप से होती है, लेकिन गढ़ गणेश मंदिर में भगवान अपने बाल रूप में विराजमान हैं। मान्यता है कि शिशु अवस्था में गणेश जी की सूंड नहीं थी, इसी स्वरूप को यहां पूजा जाता है। यह संभवतः देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां बिना सूंड वाले गणेश जी की पूजा होती है।

अश्वमेघ यज्ञ की भस्म से बनी है प्रतिमा

इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण करीब 290 साल पहले जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाया था। इतिहास के अनुसार, महाराजा ने नाहरगढ़ की पहाड़ी पर अश्वमेघ यज्ञ का आयोजन किया था। मंदिर में गणेश जी के दो विग्रह हैं, पहला विग्रह आंकडे (मदार) की जड़ से बना है और दूसरा विग्रह अश्वमेघ यज्ञ की पवित्र भस्म से तैयार किया गया है।

राजा दूरबीन से करते थे भगवान के दर्शन

स्थापत्य कला का यह एक अद्भुत उदाहरण है। मंदिर को पहाड़ी पर इस ऊंचाई और कोण पर बनाया गया है कि सिटी पैलेस (राजमहल) के चन्द्र महल से दूरबीन के जरिए भगवान की प्रतिमा साफ दिखाई देती है। रियासत काल में जयपुर के महाराजा अपने दिन की शुरुआत चंद्र महल से दूरबीन द्वारा बाल गणेश के दर्शन करके ही करते थे।

साल के दिनों के बराबर हैं सीढ़ियां

पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने का रास्ता भी बेहद खास है। मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 365 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो साल के 365 दिनों का प्रतीक मानी जाती हैं। चढ़ाई के दौरान रास्ते में एक प्राचीन शिव मंदिर भी आता है, जहां पूरे शिव परिवार के दर्शन होते हैं।

मूषक के कान में कही जाती है 'मन की बात'

मंदिर परिसर में पत्थर के बने दो बड़े मूषक (चूहे) स्थापित हैं। श्रद्धालुओं में अटूट विश्वास है कि अगर इन मूषकों के कान में अपनी इच्छा या मनोकामना धीरे से कही जाए, तो वे उसे बाल गणेश तक पहुंचा देते हैं। यहां देश के कोने-कोने से भक्त अपनी झोली भरने आते हैं।

गढ़ गणेश मंदिर अपनी मर्यादा और नियमों के लिए भी जाना जाता है। यहां फोटोग्राफी पूरी तरह वर्जित है, ताकि मंदिर की पवित्रता और एकांत बना रहे। हालांकि, मंदिर की पहाड़ी से पूरे गुलाबी शहर का नजारा किसी जन्नत से कम नहीं लगता। यहां से सिटी पैलेस, त्रिपोलिया बाजार, न्यू गेट और अल्बर्ट हॉल एक सीधी रेखा में दिखाई देते हैं।