‘मोहब्बत, उदासी व यौन संबंध सभी जीवन का अहम हिस्सा, इन पर हाे खुलकर बात‘

जेएलएफ के चौथे दिन रविवार को दरबार हॉल में 'बदला जमाना, बदली कहानी : चेंजिंग टाइम, चेंजिंग स्टोरी' विषय पर सत्र आयोजित हुआ

जयपुर। जेएलएफ के चौथे दिन रविवार को दरबार हॉल में 'बदला जमाना, बदली कहानी : चेंजिंग टाइम, चेंजिंग स्टोरी' विषय पर सत्र आयोजित हुआ। सत्र के दौरान लेखक गौरव सोलंकी की किताब 'ग्यारहवीं के लड़के' का लोकार्पण हुआ। पुस्तक का विमोचन वहां मौजूद दो स्कूल गर्ल्स ने किया किया।

 

सत्र में सौलंकी ने कहा कि कि कहानियों में इश्क, मोहब्बत, उदासी, सामाजिक समस्याएं के साथ सेक्सुअलिटी भी हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा है, उसके बारे में सलीके से बात होनी चाहिए। क्योंकि जिस समाज में खुलकर बात नहीं होती वहां तनाव बढ़ता है, जिससे अपराध बढ़ते हैं। ऐसे में खुलेपन की बहुत आवश्यकता है। गौरव का कहना है कि फेसबुक और इंटरनेट पर बहुत साहित्य आ रहा है, लेकिन वक्त के साथ सब छंट जाएंगे।

 

वहीं लेखक सत्या व्यास ने कहा कि कहानियां 21वीं सदी के दूसरे दौर में बदले लगी और जो कहानियां आने लगी थी, वह आपकी और हमारी कहानियां थी। कहानियां उसी तरह बदल रही थी, जिस तरह समाज अपने आप को बदल रहा था।

 

सूचनाक्रांति के बाद जो आमुलचूल परिवर्तन हुआ, उसने साहित्य को भी बदल दिया। कहानियों पर सोशल मीडिया का प्रभाव पड़ा है। अब सोशल मीडिया के पाठकों के हिसाब से कहानियां लिखी जाने लगी हैं। सोशल मीडिया पर प्रकाशकों की भी नजर है।

 

'युधिष्ठिर असली धर्मराज नहीं, उन्होंने अधर्म किया'
'युधिष्ठिर असली धर्मराज नहीं थे, उन्होंने ही अधर्म किया। उन्होंने द्रोपदी को जुएं में लगा दिया।' यह बात कही भरतनाट्यम की प्रसिद्ध डांसर सोनल मानसिंह ने। सोनल फ्रंट लॉन में आयोजित 'दी डांसर एंड दी डांस' सत्र में बोल रही थी। सोनल ने कहा कि भरी सभा में जब द्रोपदी का चीरहरण हो रहा था, वो सारे बड़े लोगों से सवाल कर रही थी। जिससे वहां बैठे सभी गुरुओं ने गर्दन झुका ली, लेकिन कोई उसके सवालों का जवाब नहीं दे सका। वहीं, अपने कई अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि इंसान को कभी बेताल और बेसुरा नहीं होना चाहिए। उन्होंने अपनी बातों से लोगों को खूब हंसाया।

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