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Rajasthan Politics : ‘इस्तीफा दें कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा’, खाद-बीज घोटाले पर कांग्रेस के हमलावर तेवर

बीकानेर में कांग्रेस की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस। बीज निगम घूसकांड को लेकर कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और भाजपा उपाध्यक्ष बिहारीलाल बिश्नोई के इस्तीफे की मांग। 13 जिलों की जांच पर उठाए गंभीर सवाल।

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Congress Press Conference Bikaner Demand Kirodi Lal Meena Resignation Seed Scam

Dr. Kirodi Lal Meena - File PIC

राजस्थान के कृषि विभाग में बीज और खाद कारोबार से जुड़े करोड़ों रुपए के कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा राजस्थान राज्य बीज निगम के अशासकीय निदेशक जुगल किशोर बिश्नोई की गिरफ्तारी के बाद अब इस पूरे मामले की आंच पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर संभाग तक पहुंच चुकी है। बुधवार को बीकानेर के गंगाशहर स्थित कांग्रेस कार्यालय में शहर और देहात कांग्रेस की संयुक्त प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इसमें कांग्रेस के विधायकों, जिला प्रभारियों और स्थानीय संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों ने एक सुर में भजनलाल सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को आड़े हाथों लिया। विपक्ष ने इस महा-घूसकांड की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के इस्तीफे को निष्पक्षता की पहली शर्त बताया है।

'घोटाला इतना बड़ा, तो कार्रवाई सिर्फ 13 जिलों तक सीमित क्यों?'

बीकानेर जिला संगठन प्रभारी और अनूपगढ़ से कांग्रेस विधायक शिमला नायक ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए इस पूरे कथित खाद-बीज घोटाले के भौगोलिक और प्रशासनिक दायरे पर तकनीकी सवाल खड़े किए। विधायक शिमला नायक ने कहा कि बीज और खाद के इस काले कारोबार से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में जितने भी रसूखदार लोग संलिप्त हैं, उन सभी के खिलाफ बिना किसी राजनैतिक दबाव के पूरी तरह से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

विधायक शिमला नायक ने राजस्थान राज्य बीज निगम के अशासकीय निदेशक जुगल किशोर बिश्नोई सहित अन्य सभी गिरफ्तार और नामजद आरोपियों के खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, "अगर यह भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का मामला इतने व्यापक स्तर का है और इसके तार सचिवालय से लेकर कई संभागों से जुड़े हैं, तो फिर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की कार्रवाई केवल राजस्थान के 13 जिलों तक ही सीमित क्यों रखी गई है? बाकी के जिलों में कृषि विभाग की फाइलों और खाद-बीज वितरण की जांच क्यों नहीं की जा रही है?"

उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण में करोड़ों रुपए के बड़े वित्तीय भ्रष्टाचार की आशंका है और सरकार को सबसे पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सूबे के गरीब और अन्नदाता किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज और खाद सही समय पर उपलब्ध हो सके।

'भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारीलाल बिश्नोई को भी हटाए सरकार'

प्रेस वार्ता के दौरान देहात कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने इस पूरे मामले को सीधे तौर पर भाजपा के संगठनात्मक और प्रशासनिक रसूख से जोड़ते हुए बेहद हमलावर रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को सत्ता के संरक्षण में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

बिशनाराम सियाग ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सीधी मांग करते हुए कहा कि मामले की पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के साथ-साथ भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारीलाल बिश्नोई को भी उनके पदों से तत्काल प्रभाव से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक इन बड़े चेहरों को पदों से अलग नहीं किया जाएगा, तब तक निचले स्तर के अधिकारियों और गिरफ्तार हुए बिचौलियों से इस महा-घूसकांड के असली मास्टरमाइंड तक पहुंच पाना एसीबी के लिए नामुमकिन होगा।

'ACB की FIR दे रही है बड़े नेक्सस का संकेत'

बीकानेर शहर कांग्रेस के अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल ने इस पूरे मामले के कानूनी और तकनीकी पहलुओं को मीडिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की ओर से दर्ज की गई एफआईआर के भीतर जिन कथित टेलीफोन वार्तालापों और कॉल रिकॉर्डिंग्स के विवरण का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, वह साफ तौर पर इस मामले के एक बहुत बड़े और व्यापक नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

मदन गोपाल मेघवाल ने कहा कि एफआईआर में दर्ज संवादों से यह साफ हो चुका है कि रिश्वत का यह खेल केवल एक निगम या निदेशक स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार बहुत ऊपर तक जुड़े हुए थे। उन्होंने कहा, "कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को खुद को पाक-साफ साबित करने के लिए और इस पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। एक मंत्री के पद पर रहते हुए विभागीय अधिकारी कभी भी खुलकर और बिना किसी डर के सच सामने नहीं ला पाएंगे, इसलिए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उनका पद छोड़ना बेहद आवश्यक है।"

इन नेताओं ने भी दर्ज कराया अपना विरोध

बीकानेर के गंगाशहर में आयोजित हुई इस संयुक्त प्रेस वार्ता में केवल शहर और देहात के अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और स्थानीय ब्लॉक अध्यक्ष भी पूरी एकजुटता के साथ शामिल हुए। सभी नेताओं ने एक सुर में किसानों के हक में आवाज बुलंद की।

इस महत्वपूर्ण राजनैतिक प्रेस वार्ता के दौरान मंच पर और संगठन के रूप में ये प्रमुख पदाधिकारी- राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के महासचिव जिया उर रहमान आरिफ, बीकानेर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता यशपाल गहलोत, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष आनंद सिंह सोढ़ा, ब्लॉक अध्यक्ष शहजाद भुट्टा, कांग्रेस पदाधिकारी सुमित कोचर और जाकिर नागौरी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

सभी उपस्थित नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि भजनलाल सरकार ने इस मामले को दबाने का प्रयास किया या केवल छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाकर बड़े राजनेताओं को बचाने की कोशिश की, तो कांग्रेस पार्टी बीकानेर संभाग सहित पूरे राजस्थान के भीतर ग्राम पंचायत स्तर पर किसानों को लामबंद करके एक बहुत बड़ा और राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन शुरू करने के लिए पूरी तरह मजबूर होगी।

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