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Rajasthan Farmer : राजस्थान के चार जिलों में होती है पान की खेती, वैज्ञानिक विधि से करें, मिलेगा मुनाफा

Rajasthan Betel Cultivation : राजस्थान में करौली, भरतपुर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर के सीमित क्षेत्र में किसान पान की खेती करते हैं। खेती वैज्ञानिक ढंग से करने से अच्छी पैदावार और मुनाफ कमा सकते हैं।

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Rajasthan four districts Betel cultivation If do it scientifically you get huge profits

Rajasthan Betel Cultivation News : खेत में पान की बेल। फोटो पत्रिका

Rajasthan Betel Cultivation News : जयपुर. पान खेती मुनाफा देने वाली नकदी फसल है, जो मुख्य रूप से छायादार और नम स्थान (बरेजा/ पोली हाउस) में की जाती है। भारत में मुख्य रूप से पान की खेती पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, आंध्र प्रदेश, ओडीसा, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल में की जाती है। राजस्थान में करौली, भरतपुर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर के सीमित क्षेत्र में किसान इसकी खेती कर रहे हैं। यह बहुवर्षीय सदाबहार छाया पसंद लता है।

मिट्टी व जलवायु

खेती के लिए 15 से 40 डिग्री तापमान और नियमित सिंचाई की जरूरत होती है। अच्छी जल निकास वाली दोमट मिट्टी जिसका पीएच मान 5.6 से 8.2 हो खेती के लिए उपयुक्त रहती है। खाद-उर्वरक का प्रयोग मिट्टी की जांच के आधार पर करें। सामान्यतः 100-50-100 किलो एनपीके प्रति हेक्टयर प्रति वर्ष दें। नीम-सरसों की खली मिट्टी में मिलाना फसल के लिए लाभप्रद होता है। मार्च-अप्रैल में कलम रोपण करते हैं।

पान की खेती पॉलीहाउस में करें, सीधी धूप उत्पादन को प्रभावित करती है। इसके रोपण के लिए 5-6 इंच की कलम को 60 सेमी लाइन से लाइन की दूरी एवं 30 सेमी पौधे से पौधे की दूरी पर लगाएं। प्रतिवर्ष प्रति पौधे करीब 60-70 पत्ते देता है।

निराई-गुड़ाई और सिंचाई

बंगला, कपूरी, कलकतिया मुख्य किस्में मानी जाती हैं। समय-समय पर निराई गुडाई करें। वरना खरपतवार से उत्पादन कम होगा। हल्की परंतु बार-बार सिंचाई करें। धान-पान नित्य स्नान यानी पान को जल चाहिए, परंतु जलभराव नहीं। रोपण के 20-30 दिन बाद बेल बढ़ने लगती है। सहारा देने के लिए छड़ी रोपें। बारिश के समय पत्तियों पर काले धब्बे हो जाते हैं। नियंत्रण के लिए बोर्डो मिश्रण का छिड़काव करें। रोपण के तीन-चार महीने बाद पत्ते तोड़ने लायक हो जाते हैं।

पैकिंग और परिवहन

तुड़ाई के बाद पत्तों को छायादार और ठंडी जगह पर रखें। साइज क्वालिटी के हिसाब से उनकी छंटाई करें। पान को हमेशा हवादार बांस की टोकरियों में पैक करें। टोकरी के अंदर चारों तरफ और नीचे केले के गीले पत्ते या गीला सूती कपड़ा बिछाएं। यह पत्तों को नमी देता है और बाहर की गर्मी से बचाता है। पत्तों को एक के ऊपर एक व्यवस्थित तरीके से रखें, ताकि वे आपस में रगड़ खाकर फटें नहीं। मंडी ले जाने के लिए ऐसे वाहन का उपयोग करें, जिसमें हवा का वेंटिलेशन अच्छा हो।

रेफ्रिजरेटेड वैन का उपयोग भी कर सकते हैं। पत्तों को एक-दूसरे के ऊपर इस तरह न रखें कि नीचे वाले पत्तों पर दबाव पड़े और वे दबकर काले हो जाएं। अगर मंडी दूर है और सफर लंबा है, तो बीच-बीच में टोकरी के ऊपर हल्के पानी की बूंदों का छिड़काव करें, ताकि नमी बनी रहे। फसल को मंडी में सुबह जल्दी बोली शुरू होने से पहले पहुंचाएं।

बहुत ज्यादा ओस हो तो तुड़ाई न करें

पत्तों की तुड़ाई सुबह धूप निकलने से पहले या शाम को सूरज ढलने के बाद करें। केवल उन्हीं पत्तों को तोड़ें जो पूरी तरह विकसित हो चुके हों। कोमल पत्तों को न तोड़ें। पत्ते को बेल से अलग करते समय ध्यान रखें कि बेल को झटका न लगे। पत्ते के डंठल का कुछ हिस्सा पत्ते के साथ रखें, इससे पत्ता लंबे समय तक ताजा रहता है। खेत में पानी के तुरंत बाद या बहुत ज्यादा ओस हो तो तुड़ाई न करें।
सुनील कुमार खोईवाल, कृषि अधिकारी, सीओई, चित्तौड़गढ़

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