
जयपुर।
मतदान की तिथि नजदीक आती जा रही है लेकिन कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियां अभी तक अपने पूरे उम्मीदवार घोषित नहीं कर पाई है। अगर कांग्रेस की बात की जाए तो पार्टी इस उलझन में फंसी है कि मंत्रियों को मौका दिया जाए या नए चेहरे पर दांव लगाएं। कांग्रेस ने 19 में से 6 नए चेहरों को मौका दिया है जबकि 10 पूर्व सांसदों को मैदान में उतारा है। वहीं खबरें ये भी है कि हाल ही में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की सभा में कांग्रेस का हाथ थामने वाले घनश्याम तिवाड़ी (Ghanshyam Tiwari) को पार्टी टिकट दे सकती हैं। सुत्रों की माने तो कांग्रेस झालावाड़-बांरा से घनश्याम तिवाड़ी (Ghanshyam Tiwari Congress) को मैदान में उतार सकती है। पार्टी में इस रणनीति पर भी विचार चल रहा है।
मंत्री और नए चेहरों के चयन में उलझी कांग्रेस
झालावाड़-बांरा: पिछला चुनाव प्रमोद जैन भाया ने लड़ा लेकिन जीत नहीं सके। वह भी अब राज्य में मंत्री बन चुके हैं। पार्टी का मंथन इस पर चल रहा है कि मंत्री या उनके परिवार में से किसी सदस्य को उतारा जाए या फिर नए चेहरे को मौका दें। यहां पार्टी अभी तक मंत्री के अलावा किसी अन्य मजबूत उम्मीदवार को तलाश नहीं सकी है। हालांकि हाल ही में कांग्रेस में आए घनश्याम तिवाड़ी को इस सीट पर दुष्यंत सिंह के खिलाफ उतारने की रणनीति पर भी विचार चल रहा है।
श्रीगंगानगर: पिछले चुनाव में पार्टी ने मास्टर भंवरलाल मेघवाल को यहां से उतारा था। अब राज्य में मंत्री हैं। पार्टी यहां भी मजबूत उम्मीदवार को लेकर उलझी है। पूर्व सांसद के साथ ही अन्य उम्मीदवार को लेकर यहां चर्चा चल रही है।
जयपुर ग्रामीण: पिछले दो लोकसभा चुनाव लालचंद कटारिया व सी.पी. जोशी ने लड़े। कटारिया चुनाव जीते और जोशी हारे। अभी कटारिया मंत्री व जोशी विधानसभा अध्यक्ष हैं। पार्टी इस सीट पर राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के सामने मजबूत चेहरा उतारना चाहती है।
अजमेर: उप चुनाव में रघु शर्मा ने भाजपा से भारी अंतर से यह सीट जीती थी। वह अब मंत्री हैं। ऐसे में यहां भी मजबूत उम्मीदवार को लेकर मामला फंसा हुआ है। पार्टी ने हाल में घोषित 19 प्रत्याशियों में एक भी ब्राह्मण प्रत्याशी को मौका नहीं दिया है। अत: पार्टी में मंथन चल रहा है कि रघु को उतारने पर मजबूत प्रत्याशी के साथ ब्राह्मण चेहरा भी आ जाएगा।
राजसमंद: भाजपा का प्रत्याशी सामने नहीं आने की वजह से ही कांग्रेस ने भी अभी तक यहां से प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। हालांकि पार्टी कई नामों पर चर्चा कर चुकी है। अंतिम दो नामों को पैनल में रखकर पार्टी भाजपा प्रत्याशी की घोषणा का इंतजार कर रही है।
भीलवाड़ा: पिछला चुनाव अशोक चांदना ने लड़ा लेकिन वह हार गए थे। अब मंत्री बन चुके हैं। इससे पहले सी.पी. जोशी यहां से जीत दर्ज कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी इन दोनों के साथ अन्य नामों पर भी विचार कर रही है। इस सीट पर गुटबाजी ने भी पार्टी को मुश्किल में फंसा रखा है। यही वजह है कि पार्टी यहां एकराय बनाकर उम्मीदवार उतारने के पक्ष में हैं। इस सीट के दो दावेदारों की चर्चा एक बैठक में सार्वजनिक रूप से भी हो चुकी है। सीईसी की बैठक में इस सीट पर एक उम्मीदवार का तो राहुल गांधी तक ने नाम लिया था। हालांकि निर्णय नहीं हो सका।
Published on:
30 Mar 2019 04:35 pm
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