
जयपुर . आजकल के बढ़ते फ्लेट कल्चर में प्लांट लवर्स को अपनी हॉबी पूरी करने की जगह नहीं मिलती, ऐसे में लोगों के लिए मिनिएचर गार्डन और स्मॉल गार्डन अच्छे ऑप्शन साबित हो रहे हैं। ये मिनिएचर गार्डन से हॉबी करने के साथ-साथ घर को कूल रखने और सुंदर बनाने के लिए के काम भी आ रहे हैं। यही वजह है कि इन दिनों शहर में डेकोरेटिव मिनिएचनर गार्डन का टे्रंड इन दिनों खूब बढ़ रहा है, जो घर के इंटीरियर को इको फ्रेंडली टच दे रहे हैं। ये मिनएिचर गार्डन इंटीरियर और एक्टीरियर दोनों की खूबसूरती बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। क्योंकि इन मिनिएचर गार्डन में लगाए जाने वाले प्लांट्स इंडोर और आउटडोर दोनों तरह के यूज होते हैं। इतना हीं नहीं स्पेस के अकोर्डिंग क्रिएटिव लोग इन्हें घर पर ही क्रिएट कर रहे हैं। ये गार्डन टेबल, खिडक़ी, कॉर्नर और वॉशवेशन की शोभा बढ़ा रहे हैं।
ये प्लांट्स होते हैं यूज
मिनिएचर गार्डन में नॉर्मल प्लांट की जगह ऐसे प्लांट्स यूज किए जाते हैं जो साइज में ज्यादा बढ़े नहीं और जिनकी लाइफ भी लॉन्ग होती है। इनमें मिनीप्लांट, एस्पेरागस, आईवीए फर्न जूनियर्स, बैंजामिन, नोलिना पाम, पांडा और सक्लेंट प्लांट्स के साथ-साथ बड़ी साइज के मिनिएचर गार्डन में बोनसाई पेड़ का यूज किया जाता है।
वेस्ट मटेरियल का बेस्ट रीयूज
मिनिएचर गार्डन के लिए वेस्ट मटीरियल का भी यूज किया जा रहा है। पॉट के लिए पुराने छोटे फाउंटेन, पुरानी ट्रे, टब और बोटल को पेंट कर यूज किया जा रहा है। वहीं बच्चों के पुराने खिलौने और अन्य सामान को सजावट के लिए भी यूज किया जा रहा है। इस गार्डन की सजावट मेंं टेराकोटा और रबर के बने टॉयज, चेयर, टेबल, रंगीन पत्थर , शंख, ग्लास बाउल, क्ले से बने पहाड, जंगल सहित कई क्रिएटिव आइटम का यूज होता है।
मेंटिनेंस है आसान
मिनिएचर गार्डन बतौर गिफ्ट भी खूब हिट हो रहे हैं। बर्थडे हो या एनीवर्सरी आजकल प्लांट्स देने का चलन काफी ग्रो कर रहा है। सुंदर से ट्रे पॉट, टॉयज और एनिमल शेप में बने गमले में बने ये गार्डन लोगों को बहुत लुभा रहे हैं। यही नहीं मिनिएचर गार्डन के प्लांट्स की मेंटिनेंस भी आसानी की जा सकती है। किचन गार्डन एसोशिएसन मानसरोवर की अध्यक्ष जया ने बताया कि इस गार्डन के पौधों की लाइफ लम्बी होती है। इनके पौधे मार्केट में अवेलेबल होने के साथ-साथ आसानी से घर पर तैयार किए जा सकते हैं। बस पौधे के अकोर्डिंग धूप-छांव का और खाद-पानी ध्यान रखना जरूरी है।
Published on:
01 May 2018 01:01 pm

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