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मुख्य सचिव बदलते ही ‘कैद’ से बाहर आईं फाइलें

देर रात पर्यटन, पुरातत्व एवं कला संस्कृति और वन विभाग से जुड़ी 100 से ज्यादा फाइलें संबंधित विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव के कार्यालय पहुंच गईं।

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देर रात पर्यटन, पुरातत्व एवं कला संस्कृति और वन विभाग पहुंची 100 से ज्यादा फाइलें
जयपुर
प्रदेश में मुख्य सचिव बदलते ही निहालचंद गोयल के दफ्तर में एक साल से 'कैद' फाइलें भी बाहर आ गईं। देर रात पर्यटन, पुरातत्व एवं कला संस्कृति और वन विभाग से जुड़ी 100 से ज्यादा फाइलें संबंधित विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव के कार्यालय पहुंच गईं। हालांकि आइएएस अधिकारियों की तबादला सूची में पर्यटन, पुरातत्व एवं कला संस्कृति और वन विभाग के एसीएस सुबोध अग्रवाल का भी तबादला हो गया। इससे अग्रवाल ने इन फाइलों को रिसीव नहीं किया। गोयल के कार्यालय से फाइलों का बंडल आते ही पर्यटन, पुरातत्व एवं कला संस्कृति और वन विभाग के निर्वतमान एसीएस सुबोध अग्रवाल ने संबंधित विभागों के मातहत अधिकारियों को वाट्सएप मैसेज भेजकर फाइलों को अपने स्तर पर संभालने के लिए कहा।

अपने स्तर पर फाइलें निपटाने का संदेश
अग्रवाल की ओर से अधिकारियों को भेजे गए संदेश में लिखा है कि मुख्य सचिव कार्यालय से बड़े पैमाने पर फाइल्स आईं हैं। ये फाइलें उस समय की हैं, जब निहालचंद गोयल पर्यटन, पुरातत्व एवं कला संस्कृति और वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव थे। अब ये फाइलें निचले स्तर के संबंधित अधिकारियों को भिजवाई जा रही हैं। इनमें से कुछ फाइलें ऐसी हैं, जिन्हें री-सबमिट करने की जरूरत है और कुछ का टाइम लैप्स हो गया है। बदली हुई परिस्थितियों में संबंधित अधिकारी इन फाइलों को संशोधन करके एक सप्ताह में दोबारा सबमिट करें। एसीएस कार्यालय को दरकिनार कर सीधे तौर पर मिली इन फाइलों को सबमिट करते समय ये सुनिश्चित करें कि डिस्पैच रजिस्टर में इन्द्राज हो।

निचले अधिकारियों में घबराहट, असमंजस
एसीएस से मिले मैसेज के बाद पर्यटन, पुरातत्व एवं कला संस्कृति और वन एवं पर्यावरण विभाग के मध्यम और निचले स्तर के अधिकारियों में घबराहट बढ़ गई है। उन्हें इस बात का पता नहीं है कि जिन फाइलों का टाइम लैप्स हो गया है या जिन पर अमल नहीं हो पाया है, उसका जिम्मा कौन उठाएगा? क्योंकि तत्कालीन एसीएस अब मुख्य सचिव पद से रिटायर हो गए हैं। गोयल की जगह पर एसीएस बने सुबोध अग्रवाल का भी तबादला हो गया है।

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