
मां दुर्गा के पांडालों में दिखेगी रियासत काल की झलक
हर्षित जैन/जयपुर. नवरात्री में कुछ ही दिन शेष हैं। मां दुर्गा के साथ शक्ति की उपासना के इस पर्व के दौरान नौ दिनों तक बंगाली समुदाय सहित अन्य वर्गों के लोग भी घरों व पांडालों में नवदुर्गा की आराधना करेंगे। साथ ही जय क्लब सहित विभिन्न स्थानों पर कोलकाता की तर्ज पर पांडाल सजाए जाएंगे। दिल्ली व मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों से आए कलाकार विशेष पांडाल तैयार कर रहे हैं।
साक्षात देवी के होते हैं दर्शन
नवरात्री से करीब तीन माह पूर्व दुर्गाबाड़ी (बनीपार्क) में मां दुर्गा की प्रतिमाएं बनने का काम अब अंतिम दौर में है। कोलकाता से आए कलाकार वहां से लाई गई गंगा नदी की मिट्टी से दुर्गा माता की प्रतिमा का निर्माण कर रहे हैं। पिछले बीस सालों से यहां दुर्गा मां की मूर्ति बना रहे इन कलाकारों के मुताबिक प्रतिमा पर गंगा नदी की मिट्टी के आखिरी लेप के बाद मूर्तियां साक्षात देवी का रूप नजर आती हैं।
पहले नवरात्र पर मां करेंगी नौका की सवारी
जयपुर दुर्गा बाड़ी एसोसिएशन के अध्यक्ष कर्नल के.मुखर्जी व सचिव संतोष दास ने बताया कि १९५६ से दुर्गा बाड़ी में दुर्गा पूजा महोत्सव मनाया जाता है। इस बार पहला नवरात्रा बुधवार को होने से मां की सवारी नौका पर विराजमान होगी। कलाकार दुर्गा मां की विशेष नौका वाली प्रतिमाएं बना रहे हैं। कलाकार अमित पाल (कोलकाता) ने बताया कि इस बार कोलकाता के बाग बाजार की तर्ज पर पंडालों में पूजा-पाठ किया जाएगा। वहीं, पुरानी रजवाड़ी मां दुर्गा की प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं, जिनमें मां सरस्वती, मां काली व मां लक्ष्मी की प्रतिमाएं विशेष हैं। साज-सज्जा व शृंगार के बाद प्रतिमा की लागत करीब 25, 000 से 1,25,000 रु. तक पहुंच जाती है।
पांडाल भी होगा खास
संयोजक आशीष मुखर्जी ने बताया कि पांडालों को रियासत काल के जमींदारों के भवनों व महल की तरह सजाया जा रहा है। मुख्य गेट लगभग 51 फीट का होगा। वहीं इंटीरियर भी खास होगा। इस बार पर्यावरण संरक्षण थीम को ध्यान में रखते हुए मां के साक्षात रूप को दिखाया जाएगा।
Published on:
06 Oct 2018 11:12 am
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