
Goga Dev Ki Puja Ka Mahatava , Goga Navami Puja Vidhi
जयपुर.
भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की नवमी अर्थात कृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन गोगा देवता की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत भी रखा जाता है। गोगाजी राजस्थान के लोक देवता हैं। गोगाजी को सांपों के देवता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि वे सर्पदंश से मुक्ति दिलाते हैं। साथ ही गोगा देव संतान के जीवन की रक्षा करते हैं। संतान की दीर्घायु और स्वास्थ्य के साथ ही संतान प्राप्ति के लिए भी गोगा देव की पूजा की जाती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक दीक्षित बताते हैं कि गोगा देव का जन्म राजस्थान के चौहान वंश में गुरु गोरखनाथ के वरदान से हुआ था। गोगा देव नागों को वश में करने वाले थे। उन्हें जाहरवीर गोगाजी के नाम से भी जाना जाता है। जन्माष्टमी के दूसरे दिन गोगा नवमी के दिन उनका जन्मोत्सव हर्षोल्लास से मनाया जाता है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में यह पर्व पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। बताते हैं कि सभी प्रयत्न करने के बाद भी जब कोई संतान नहीं हुई तो गोगा देवजी की माँ बाछल देवी गुरु गोरखनाथ की शरण में गईं।
गुरू गोरखनाथ ने उन्हें अभिमंत्रित किया हुआ गुगुल का फल देते हुए पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। इस फल और वरदान के प्रभाव के रूप में रानी बाछल को पुत्र प्राप्ति हुई जिनका नाम गोगा या गुग्गा रखा गया था। यही कारण है कि पुत्र प्राप्ति की इच्छा से इस दिन व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने और पूजा करने से गोगा देव और गुरू गोरखनाथ के आशीर्वाद से पुत्र प्राप्ति जरूर होती है।
ऐसे करें पूजा
नवमी के दिन स्नानादि करके गोगा देव की मूर्ति या तस्वीर की पूजा करें। खीर,चूरमा,गुलगुले आदि का भोग लगाएं। गोगाजी के घोड़े को भी चने की दाल का भोग लगाएं। नागदेवता की भी पूजा-अर्चना करें। गोगाजी की कथा सुनें।
Published on:
13 Aug 2020 09:15 am
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