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सोने-चांदी के बर्तन में खाने से सेहत सॉलिड और दिमाग तेज

सोना चांदी के बर्तन में बना या परोसा हुआ खाना शरीर को मज़बूत बनाने के साथ दिमाग को तेज बनाता है।

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बर्तनों में खाना पकाने और खाने से भी शरीर पर उसका प्रभाव पड़ता है। पुराने समय में राजा महाराजा और अन्य शाही परिवारों के घरों में सबसे अधिक सोना चांदी के बर्तनों का इस्तेमाल होता था जिसमें मौजूद माइक्रो एलीमेंट (सूक्ष्म तत्व) खाने के साथ शरीर के भीतर जाकर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करते थे।

ये बर्तन जिन तत्वों से बनते हैं वो जमीन के भीतर से निकालकर तैयार किए जाते हैं जिनमें सभी तरह के गुण होते हैं जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। खास बात ये है कि इन घातुओं से बने बर्तनों में खाना पकने या खाना खाने से शरीर के भीतर जो भी दूषित तत्व होते हैं बाहर निकल जाते हैं। इन धातुओं से बने बर्तनों में जो तत्व होते हैं वे शरीर के भीतर माइक्रो न्यूट्रिएंटस के तौर पर शरीर के भीतर जाकर सकारात्मक असर करते हैं और सेहत सॉलिड बनने के साथ दिमाग तेज होता है।

सोना: सोना खरा और शुद्ध होता है। पुराने समय के राजा-महाराजा और राजशाही परिवारों में खोने के लिए सोने से बर्तनों का प्रयोग करते थे। सोने के बर्तन में खाना खाने से सोने में मौजूद माइक्रो एलीमेंट (सूक्ष्म तत्व) शरीर में भीतर जाता है और शरीर को मजबूत बनाने के साथ उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। ये भी कहा जाता है कि सोने के बर्तन में खाने से मन मस्तिष्क तेज रहता है और व्यक्ति के भीतर एक जबरदस्त ऊर्जा होती है।

चांदी: चांदी भी पूरी तरह शुद्ध होती है और वो जिन तत्वों से बनी होती है उसमें खाना खाने से उसके तत्व शरीर के भीतर सीमित मात्रा में पहुुंचते हैं। इन तत्वों से शरीर की हड्डियों से लेकर मांसपेशी और रोग प्रतिरोधक क्षमता को संतुलित रखता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के खिलाफ कोई तत्व बनता है तो चांदी के माइक्रो एलीमेंट उस तत्व को रोकने या खत्म करने का काम करते हैं। चांदी के बर्तन में खाना खाने से रक्तसंचार की गति भी संतुलित रहती है।

डॉ. अजय साहू, आयुर्वेद विशेषज्ञ