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Gold Silver Mines: सोना-चांदी से लेकर 82 प्रकार के खनिजों का भंडार, राजस्थान बना ‘म्यूजियम ऑफ माइन्स’

Mineral Resources: जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया संग्रहालय बना प्रदेश की भूविज्ञानिक पहचान का प्रतीक, खनन क्षेत्र में तेजी, राज्य सरकार कर रही है योजनाबद्ध खनन ब्लॉकों की नीलामी

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जयपुर

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Rajesh Dixit

May 08, 2025

Rajasthan Mining: जयपुर। राजस्थान न केवल अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी भूमि के गर्भ में छुपी भूवैज्ञानिक विरासत भी विश्वभर में अद्वितीय है। प्रमुख शासन सचिव, खान एवं भूविज्ञान विभाग टी. रविकान्त ने कहा है कि राजस्थान की धरती अरबों वर्षों पुरानी भूगर्भीय गतिविधियों की साक्षी रही है। यहां आर्कियन, टर्शियरी, मेसोजोइक और अरावली युग की चट्टानों और खनिजों के रूप में समृद्ध भूवैज्ञानिक इतिहास मौजूद है। यह राज्य देश में खनिज संपदा के मामले में अग्रणी स्थान रखता है।

रविकान्त ने बताया कि प्रदेश में अब तक 82 प्रकार के खनिजों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 57 प्रकार के खनिजों का वाणिज्यिक स्तर पर सक्रिय खनन किया जा रहा है। इनमें सीसा-जस्ता, सोना, चांदी, तांबा, लौह अयस्क, चूना पत्थर सहित कई बहुमूल्य खनिज शामिल हैं। इसके अतिरिक्त राजस्थान में मेसेनरी स्टोन, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज भी पाए जाते हैं, जिनका महत्व वैश्विक स्तर पर बढ़ता जा रहा है।


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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा जयपुर में माइनिंग सेक्टर का एक्सीलेंस सेंटर स्थापित करने की बजटीय घोषणा का भी शीघ्र क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस एक्सीलेंस सेंटर में राज्य की ऐतिहासिक और पुरातात्विक खनिज संपदा की विकास यात्रा को वैज्ञानिक ढंग से संकलित और प्रदर्शित किया जाएगा। यह केंद्र शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और निवेशकों के लिए एक प्रेरणादायी मंच के रूप में कार्य करेगा।

प्रमुख सचिव रविकान्त ने हाल ही में झालाना स्थित जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) के खनिज संग्रहालय का भ्रमण किया, जहाँ उन्होंने विभिन्न संरक्षित चट्टानों, जीवाश्मों, खनिजों और मानचित्रों का अवलोकन किया। उन्होंने संग्रहालय में मौजूद नमूनों की सराहना करते हुए इसे "म्यूजियम ऑफ माइन्स" की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि राजस्थान में खनिजों के अपार भंडारों को देखकर यह संग्रहालय राज्य की खनिज विविधता का जीवंत दस्तावेज प्रतीत होता है।

इस अवसर पर GSI के निदेशक भूविज्ञान एम.वाई. खांडे और भूविज्ञानी त्रिपर्णा घोष ने राजस्थान की भूवैज्ञानिक संरचनाओं, बीजीसी चट्टानों, अरावली श्रृंखला, दिल्ली सुपरग्रुप, विंध्यन वेल्ट और मारवाड़ युग की चट्टानों के नमूनों और उनके भूवैज्ञानिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राजस्थान की धरती पर तीन अरब वर्ष से भी अधिक पुरानी चट्टानें उपलब्ध हैं, जो इसे वैश्विक स्तर पर एक भूविज्ञानिक धरोहर बनाती हैं।

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राज्य सरकार द्वारा खनिज खोज (मिनरल एक्सप्लोरेशन) कार्य को तीव्र गति देने के साथ-साथ खनन ब्लॉकों की योजनाबद्ध नीलामी की प्रक्रिया जारी है। यह प्रयास प्रदेश की आर्थिक वृद्धि को सशक्त आधार देने के साथ ही, राजस्थान को खनिज उद्योग के एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

यह स्पष्ट है कि राजस्थान न केवल एक पर्यटन और सांस्कृतिक गंतव्य है, बल्कि अब खनिज संसाधनों और भूवैज्ञानिक धरोहर के क्षेत्र में भी अपनी विशेष पहचान बना रहा है। आने वाले समय में यह राज्य खनिज विज्ञान और खनन तकनीक के क्षेत्र में देश को नई दिशा देने में सक्षम होगा।

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