
राजसमंद जिले में जल्द ही एक और सीमेंट ग्रेड लाइम स्टोन का भंडार मिल सकता है। इसके लिए ड्रिलिंग का कार्य जल्द शुरू होगा। यहां पूर्व में की गई ड्रिलिंग के परिणाम अच्छे आए हैं। इससे यहां पर सीमेंट फैक्ट्री आदि लगाई जा सकेगी और राजस्व में भी इजाफा होगा। जिले की भीम तहसील के बोरवा गांव में सीमेंट ग्रेड लाइम स्टोन (चूना पत्थर) के भंडार मिले हैं।
राज्य सरकार ने 1985 में यहां ड्रिलिंग कराई थी। इसमें सकारात्मक परिणाम आए थे। इसके बाद से यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। खान एवं भू-विज्ञान विभाग ने फिर से ड्रिलिंग कराने का निर्णय लिया है। राजस्थान स्टेट एस्कप्रोरेशन मिनरल ट्रस्ट यहां पर आगामी दो-चार दिनों में ड्रिलिंग शुरू करेगा। इसके लिए विभाग ने 700 हेक्टेयर क्षेत्र इसके लिए चिन्हित किया है। यहां 100 मीटर तक ड्रिलिंग की जाएगी। यहां पर निकलने वाले प्रधान खनिज को एनएबीएल लैब में टेस्ट कराया जाएगा। यहां जिले का पहला सीमेंट प्लांट भी लग सकता है।
राजस्थान में पहली सीमेंट फैक्ट्री 1915 में लाखेरी (बूंदी) में स्थापित की गई थी। वर्तमान में राजस्थान में 19 बड़े पैमाने के सीमेंट कारखाने, 4 मध्यम आकार के और 104 छोटे पैमाने के सीमेंट कारखाने हैं। सीमेंट उद्योग के स्थानीयकरण के लिए चित्तौडगढ़ और सवाई माधोपुर सबसे उपयुक्त बताया जाता है।
लाइम स्टोन सर्वाधिक सीमेंट के आता है काम
खनिज पदार्थों में चूने का पत्थर महत्वपूर्ण खनिज है। इसका उपयोग बहुत से उद्योगों में होता है। इसका सर्वाधिक उपयोग सीमेंट उद्योग में होता है। इसके अलावा चूना, कैल्शियम-कार्बाइड, रासायनिक खादों, स्टील, कपड़ा, उद्योगों, चीनी, कागज और चमड़े आदि के उद्योगों में होता है।
जिले की भीम तहसील के बोरवा में लाइम स्टोन का भंडार मिला है। इसके लिए ड्रीलिंग कार्य दो-चार दिन में शुरू होगा। सरकार ने इसे 1985 में चिन्हित किया था। यहां पर मिले सीमेंट ग्रेड लाइम स्टोन के चलते जिले का पहला सीमेंट प्लांट भी लग सकता है।
- ओ.पी.जांगिड़, वरिष्ठ भू वैज्ञानिक, खान एवं भू-विज्ञान विभाग, राजसमंद
Published on:
24 Jan 2023 06:36 pm
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