
जयपुर. चुनाव साल में समाज-संस्थाओं को रियायती दर पर जमीन आवंटन कराना सरकार के लिए चुनावी एजेंडे से कम नहीं है। मुख्यमंत्री ने राजधानी (जेडीए के 15 मामले) समेत राज्यभर में जमीन आवंटन के लंबित प्रकरणों को निपटाने के लिए नगरीय विकास मंत्री को श्रीचंद कृपलानी की आदेश दिए है। कई समाज-संस्थाओं ने तो सरकार पर रियायती दर पर जमीन आवंटन के लिए दबाव भी बना दिया है। प्रदेशभर में संस्थाओं को जमीन आवंटन के करीब 115 से ज्यादा मामला लंबित हैं। एेसे में नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी सोमवार को इस मामले में समीक्षा करेंगे।
रेवड़ी बांटने का दबाव
ऐसे में धार्मिक, सामाजिक और चैरिटेबल संस्थाओं के लंबित प्रकरणों में भूमि आवंटन सरकार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है। इनमें छात्रावास, सामाजिक गतिविधियों, धर्मशाला, सामुदायिक भवन, स्कूल के आवंटन के मामले ज्यादा शामिल हैं। आवेदनकर्ता समाज-संस्थाओं ने रियायती दर पर जमीन चाही हैं। इसमें आरक्षित दर की 10 प्रतिशत राशि पर जमीन आवंटन चाही है।
निरस्त होने की भी चिंता
सरकार को यह चिंता भी सता रही है यदि विधानसभा चुनाव में जनमत पक्ष में नहीं आया तो ऐसे जमीन आवंटन निरस्त भी हो सकते हैं। गहलोत सरकार के अंतिम छह माह के कार्यकाल में जमीनों का आवंटन मौजूदा सरकार ने आते ही निरस्त कर दिया था। अब ऐसे में चुनावी सीजन आया तो फिर से बहाल करने का काम शुरू हो गया है।
यह है स्थिति
-115 से ज्यादा मामले लंबित हैं राज्यभर में
-73 मामले स्वायत्त शासन विभाग
-42 मामले नगरीय विकास विभाग के पास
नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी इस मामले में जानकारी देते हुए कहा की सरकार अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रही है की सामाजिक संस्थाओं का सहयोग किया जा सके, क्योंकि वे भी समाज के लिए ही काम कर रही हैं। जमीन आवंटन के जितने भी मामले लम्बित हैं, उनकी जानकारी ली जा रही है।
Published on:
11 Jun 2018 02:01 pm
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