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एक और चुनावी चाल…सरकारी जमीन पर बसी कॉलोनियों को कौडिय़ों में मिलेंगे पट्टे

चुनाव से पहले राज्य सरकार का लोक—लुभावना फैसला लेने का प्रस्ताव...

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जयपुर

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Dinesh Saini

Jan 20, 2018

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जयपुर। विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार एक और लोक—लुभावना फैसला लेने जा रही है। इसमें सरकारी और अवाप्तशुदा जमीन पर बसी कॉलोनियों का नियमन काफी कम दर पर करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। प्रस्ताव में कम दर पर नियमन के लिए कट ऑफ डेट तक तय कर दी गई है। इसमें 1 जनवरी, 1997 से पहले बसी कॉलोनियों का नियमन किया जाएगा। भूखंड के आकार के अनुसार 400, 600 और 800 रुपए दर प्रस्तावित की गई है। जबकि, अभी आरक्षित दर की 25 प्रतिशत दर लेने का प्रावधान है। इसके अलावा ब्याज और पेनल्टी में 100 फीसदी छूट देने का भी प्रावधान प्रस्तावित कियाया गया है। इसके जरिए सरकार एक बार फिर अवैध बसावट को बढ़ाने का काम करेगी। इस के जरिए चुनाव से ठीक पहले मतदाताओं को लुभाने की नई प्लानिंग की गई है। हालांकि, इस मामले में नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी की अध्यक्षता में गठित कमेटी फैसला करेगी।


अभी आरक्षित दर की 25 फीसदी राशि पर नियमन करने का है प्रावधान
1 जनवरी, 1997 से पहले बसी कॉलोनियों का नियमन कम दर पर
दरें भूखंड के आकार के अनुसार 400, 600 और 800 रुपए


यह दे रहे तर्क
- सरकारी भूमि पर कॉलोनी बसे हुए वर्षों हो चुके हैं। ऐसे में भूमि को वापिस लेना संभव नहीं है।
- नियमन नहीं होने से कॉलोनी में विकास कार्य नहीं कराए जा सकते हैं। इससे लाखों लोगों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही है।
-इससे प्राधिकरण, विकास न्यास व निकायों को राजस्व मिल सकेगा। अभी कई प्राधिकरण, न्यास आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। इनमें जेडीए भी शामिल है।


अफसरों को भी उपकृत कर रहे...
कई अवाप्तशुदा सरकारी जमीन ऐसी भी हैं, जहां पॉश कॉलोनी विकसित है। ऐसी कॉलोनी में बड़े सरकारी अफसरों के भी भूखंड व मकान हैं। ऐसे अफसर भी दबाव बना रहे हैं कि उनकी कॉलोनी का नियमन कम दर पर हो जाए।


इस तरह से होगा यह एक फायदे का तरीका...
जयपुर समेत प्रदेशभर के शहरों में सरकारी व अवाप्तशुदा भूमि पर सैकड़ों कॉलोनियां बसी हैं। जयपुर में 90 से ज्यादा कॉलोनी अवाप्तशुदा भूमि पर हैं। 100 से ज्यादा कॉलोनी सरकारी भूमि या हिस्से पर विकसित हो चुकी है। इनमें हजारों मकान हैं और इतने ही मतदाता हैं। ऐसे लोग कई वर्षों से दर कम करने की मांग करते रहे हैं। इसी कारण बड़ी संख्या में भूखण्डधारियों ने पट्टा नहीं लिया है, जबकि कईयों के नियमन शिविर भी लगाए जा चुके हैं। यदि सरकार इनका नियमन कम दर पर करने का फैसला ले लेती है तो इन मतदाताओं को आसानी से लुभाया जा सकेगा।

गरीबों को पूरी माफी, ब्याज व जुर्माने की राशि में 100 फीसदी छूट....
- गरीब आवंटियों के लिए माफ होगी राशि
- 1 जनवरी,2001 से पहले के आवंटन मामलों में बकाया ब्याज व जुर्माने की राशि में 100 फीसदी छूट।
- ऐसी कृषि भूमि जो निकाय क्षेत्र में हुई शामिल और जिनका अकृषि में रूपांतरण जिला प्रशासन किया, ऐसे मामलों में 5 साल की छूट मिलेगी। अकृषि रूपांतरण की मिलेगी छूट। यदि फिर भी मौके पर अकृषि रूपांतरण् नहीं किया तो विकास शुल्क देकर 5 वर्ष तक मिलेगी छूट।


दुष्प्रभावित हो रहा नगर नियोजन
नगर नियोजन दुष्प्रभावित होता रहा है। मौजूदा सरकार भी यही कर रही है। जो गलत हैं, उन्हें संरक्षण देने का काम और जिन्होंने नियम—कायदों की पालना की, उन लोगों को ठोकरें खिलाई जाती है। अवैध तरीके से बसी कॉलोनियों को बढ़ावा देने का काम होता रहेगा तो नगर नियोजन और नगर नियोजकों की जरूरत ही कहां है। शहर के विकास का ब्लू प्रिंट मास्टर प्लान है पर इसका भी ध्यान नहीं है। हाईकोर्ट के भी आदेश हैं कि कॉलोनियों में सुविधा क्षेत्र होना जरूरी है। ऐसी जमीनों को कब्जा मुक्त कराएं, लेकिन यहां तो उलटा हो रहा है। नगर नियोजन केवल दिखावा है और कुछ नहींं। अब लोगों का अपना शहर बचाने की जिम्मेदारी उठानी होगी।
एच.एस. आजाद, वरिष्ठ नगर नियोजक