
सरकार को पिता की जाति का पता नहीं, पर पुत्र को दे रही जाति प्रमाण-पत्र
कार्मिक विभाग का अजब फरमान : जाति प्रमाणपत्र का पंगा
उदयपुर/जयपुर। राज्य सरकार (State government) का एक अजीबो-गरीब फरमान (Strange decree) इन दिनों मुसीबत का सबब बना हुआ है। जो पिता राजस्थान (Rajasthan) में वर्षों से रह रहा है, हमारी सरकार उसकी जाति की पुष्टि करने को तैयार नहीं है, लेकिन राजस्थान में जन्म (Born in rajasthan) लेने वाली उसकी संतान की जाति पर मुहर (Stamp on caste) लगाने को तैयार है। इसके पीछे कई फरमान जारी हुए तो कई लोग भी खासे परेशान हुए, लेकिन सरकार टस से मस नहीं हुई।
यह है आदेश
कार्मिक विभाग राजस्थान सरकार के परिपत्र 21 अक्टूबर, 2002 के अनुसार अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के ऐसे व्यक्ति, जो अन्य राज्यों से माइग्रेट होकर राजस्थान राज्य में निवास कर रहे हैं, उन्हें स्वयं के उपयोगार्थ तो जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सकता है, लेकिन ऐसे माइग्रेट व्यक्तियों की सतांनें, जिनका जन्म राजस्थान राज्य में ही हुआ है, यही शिक्षा ग्रहण की है, यही से मूल निवास प्रमाण पत्र प्राप्त किया है। साथ ही राज्य सरकार की ओर से जारी इन वर्गों की सूची, जिसे अधिसूचित किया गया है, तो उन्हें नियमानुसार जाति प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है। दूसरा यह है कि भारत सरकार की ओर से अन्य राज्यों से माइग्रेट होकर राजस्थान राज्य में निवास कर रहे अन्य पिछड़ा वर्ग के माइग्रेट व्यक्तियों के लिए 08 अप्रेल, 1994 को परिपत्र जारी किया गया है। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि कोई व्यक्ति यदि अपने मूल राज्य से अन्य राज्य में शिक्षा, रोजगार आदि के लिए माइग्रेट करता है तो वह देय सुविधाएं एवं रियायतें अपने मूल राज्य से पाने का अधिकारी होगा न कि उस राज्य से, जहां वह माइग्रेट होकर निवास करने लगा है।
पहले भी जारी हो चुका है आदेश
इस संबंध में तथ्य यह है कि अन्य राज्यों से माइग्रेट होकर राजस्थान राज्य में निवास कर रहे अनुसूचित जाति एवं जनजाति के व्यक्तियों के लिए भारत सरकार की ओर से 06 अगस्त,1984 को परिपत्र जारी किया गया है, इसमें स्पष्ट किया गया है कि कोई व्यक्ति यदि अपने मूल राज्य से अन्य राज्य में शिक्षा, रोजगार आदि के लिए माइग्रेट करता है तो वह देय सुविधाएं एवं रियायतें अपने मूल राज्य से पाने का अधिकारी होगा ना कि उस राज्य से, जहां वह माइग्रेट होकर निवास करने लगा है।
मूल निवासी हो ही मिलता है प्रमाण पत्र
राजस्थान के बाहर के सभी लोग सामान्य माने जाएंगे। राजस्थान के मूल निवासी के लिए ही यहां जाति प्रमाण पत्र जारी होता है। यदि कोई बाहरी राज्य से आकर यहां निवासरत है, तो उसे सरकारी योजनाओं व परीक्षाओं में वर्ग विशेष का लाभ नहीं मिलता है। खासतौर पर जनजाति क्षेत्र में जो निवासरत हैं, उन्हें विशेष लाभों के लिए जाति प्रमाण पत्र की जरूरत रहती है।
धनपतसिंह राव, बीडीओ, कोटड़ा
Published on:
02 Nov 2019 01:02 am
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