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नगर नियोजन विभाग के सरकार ने पर कतरे

बहुमंजिला इमारत में बेसमेंट तो ही फाइल जाएगी500 वर्गमीटर से बड़े भूखंडों पर भी निर्देशसंस्थानिक-व्यावसायिक निर्माण प्रस्तावित होने पर ही भेजे फाइल

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जयपुर

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Umesh Sharma

Jul 27, 2018

town planing

नगर नियोजन विभाग के सरकार ने पर कतरे

निकायों के जोनल प्लान बनाने से मना करने वाले नगर नियोजन विभाग पर यूडीएच ने निगाहें तिरछी कर दी हैं। पहले जोनल प्लान बनाने का काम निकायों को ही सौंपने के बाद अब विभिन्न प्रक्रियाओं की सभी पत्रावलियां नगर नियोजन विभाग के पास तकनीकी अनुमोदन के लिए नहीं जाएंगी। इस संबंध में नगरीय विकास विभाग व स्वायत्त शासन विभाग ने शुक्रवार को संयुक्त रूप से एक आदेश जारी किया है।
आदेश के अनुसार 15 मीटर से ऊंची इमारतों का नक्शा अनुमोदित होने के बाद इन्हें तकनीकी स्वीकृति के लिए नगर नियोजन विभाग के पास भेजा जाता था, लेकिन निकाय अपने स्तर पर ही ये मामले निस्तारित कर सकेंगे। केवल वही मामले विभाग को भेजे जाएंगे, जिनमें तहखाना प्रस्तावित होगा। इसी तरह 500 वर्गमीटर से बड़े भूखण्ड के सभी मामले विभाग के पास नहीं जाएंगे। तकनीकी अनुमोदन के लिए वही मामले विभाग के पास जाएंगे, जिनमें संस्थानिक-व्यावसायिक निर्माण प्रस्तावित होगा। ले आउट प्लान स्वीकृति के मामले भी नगर नियोजन विभाग को नहीं भेजा जाएगा। निकायों की ले आउट प्लान समिति के नगर नियोजक सदस्य तकनीकी मार्गदर्शन दे सकेंगे। इसके लिए नगर नियोजक सदस्य को बैठक से दस दिन पहले एजेण्डा भेजना होगा।


पहले किया था पावरफुल
राज्य सरकार ने पहले 16 मई को आदेश जारी कर नगर नियोजन विभाग को पावरफुल बनाया था। इसमें कहा गया था कि भवन मानचित्र व ले आउट प्लान संबंधी सभी मामले तकनीकी राय के लिए नगर नियोजन विभाग को भेजना जरूरी होगा। करीब ढाई महीने में ही सरकार ने नगर नियोजन विभाग के अधिकारों में भारी कटौती कर दी। विभाग को वही अधिकार दिए गए हैं, जिनका नगरपालिका अधिनियम में प्रावधान है।


इसलिए कर दी कटौती
अधिकारों में कटौती सबसे बड़ी वजह यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी की नाराजगी है। जोनल प्लान बनाने जैसे जिम्मेदारी वाले काम से विभाग का पल्ला झाडऩे की वजह से कृपलानी नाराज थे। इसी तरह तकनीकी राय वाली फाइलों में बेवजह अड़ंगा लगाने की विभाग की फितरत पर भी कृपलानी ने नाराजगी जताई थी। अड़ंगें लगाने की शिकायतों से परेशान कृपलानी ने उदयपुर की एक फाइल विभाग को नहीं भेजने के निर्देश तक दिए। कृपलानी तो चाहते थे कि कोई सी भी फाइल नगर नियोजन विभाग नहीं भिजवाई जाए, लेकिन नगरपालिका अधिनियम में प्रावधान के चलते कुछ मामलों को ही विभाग को भेजने का आदेश देना पड़ा।