16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नवसंवत्सर का प्रवेश वृश्चिक लग्न में, मंदी समेत कई आपदाएं

chaitra navratri 2023 : भारतीय कैलेंडर अनुसार इस बार विक्रम् संवत् 2080 का प्रवेश वृश्चिक लग्न में होने जा रहा है। इस वर्ष विश्व के अनेक देशों में विषम परिस्थितियों को पैदा करने वाला होगा।

2 min read
Google source verification
नवसंवत्सर का प्रवेश वृश्चिक लग्न में, मंदी समेत कई आपदाएं

नवसंवत्सर का प्रवेश वृश्चिक लग्न में, मंदी समेत कई आपदाएं

जयपुर। भारतीय कैलेंडर अनुसार इस बार विक्रम् संवत् 2080 का प्रवेश वृश्चिक लग्न में होने जा रहा है। इस वर्ष विश्व के अनेक देशों में विषम परिस्थितियों को पैदा करने वाला होगा। यह बात धर्माचार्यों एवं ज्योतिषियों ने पंचांग-वाचन करते हुए कही। सोमवार को यहां राजकीय महाराज आचार्य संस्कृत महाविद्यालय में पंचांग लोकार्पण किया गया। साथ ही धर्मसभा, पंचांग श्रवण और वसंत संपात चर्चा भी की गई।

राजकीय महाराज आचार्य संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संस्कृत शिक्षा के निदेशक डॉ. भास्कर शर्मा 'श्रोत्रिय' ने बताया कि प्रकृति में परिवर्तन के साथ ही भारतीय संवत्सर का भी परिवर्तन हो रहा है। 22 मार्च को पिंगल नामक संवत्सर का प्रारंभ हो रहा है। यह भारतीय कालगणना का 2080वां विक्रम् संवत् है। संयुक्त निदेशक प्रो. शालिनी सक्सेना ने बताया कि भारतीय संस्कृति का निर्वहन करते हुए विशुव दिन, जिसे वसंत सम्पात् भी कहते है एवं इसी दिन सूर्य का उत्तर गोल में भी प्रवेश हो रहा है। उसी पावन पर्व अपरा काशी जयपुर के एकमात्र एवं 1852 एवं स्थापित वैदिक परम्परा के वाहक राजकीय महाराज आचार्य संस्कृत महाविद्यालय में धर्मसभा, वसंत सम्पात्, पंचांग श्रवण के अवसर पर पंचांग लोकार्पण भी किया गया। डॉ. आलोक शर्मा के अनुसार कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि आरएएस अधिकारी आकाश रंजन, हाथोज धाम के महंत बालमुकुंदाचार्य, कार्यक्रम के अध्यक्ष संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो विनोद शास्त्री और सारस्वत अतिथि घाट के बालाजी के महंत सुदर्शनाचार्य रहे।

यह भी पढ़े : सांसद बोले, खुद की जिम्मेदारी से ही पॉलीथिन पर रोक संभव

समस्याओं से होगा सामना
पंचांग के संपादक डॉ. रवि शर्मा ने बताया कि विक्रम् संवत् 2080 का प्रवेश वृश्चिक लग्न में होगा। आर्थिक मन्दी का दौर बनने से विश्व के कई देशों की अर्थव्यवस्था चौपट होगी। महंगाई, भ्रष्टाचार, भूकम्प, प्राकृतिक प्रकोप, राजनैतिक अस्थिरता से जनता त्रस्त होगी। देश के पश्चिमी भागों में नौ मास तक दुर्भिक्ष, अकाल एवं धातुएं महंगी होंगी। प्रो. शालिनी सक्सेना ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।