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सड़क पर ठेलों का राज…जनता परेशान, जिम्मेदार चुप

स्लग-लाखों लोगों की दिक्कत, वेंडिंग जोन तक नहीं बन पाए, न ही सड़कों से ठेले हटा पा रहे सब हैडिंग-दोनों नगर निगम मिलकर शहर के 80 हजार ठेला संचालकों को व्यवस्थित नहीं कर पाए          

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सड़क पर ठेलों का राज...जनता परेशान, जिम्मेदार चुप

सड़क पर ठेलों का राज...जनता परेशान, जिम्मेदार चुप

जयपुर. राजधानी में 80 हजार से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स हैं। कोरोना के बाद इनकी संख्या में और इजाफा हुआ। इसके बावजूद शहर की दोनों सरकारें मिलकर इनको व्यवस्थित नहीं कर पाईं। अव्यवस्था का आलम यह है कि सुबह तो ठेला सड़क किनारे खड़ा होता है और शाम होते-होते सड़क के ऊपर इस कदर आ जाते हैं कि लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है।

जिम्मेदार ये

-यातायात पुलिस: शहरवासियों को सुगम राह मिले, इसकी जिम्मेदारी यातायात पुलिस की है। लेकिन सड़क से ठेले को हटाने की बजाय चालान पर पुलिस का ध्यान ज्यादा रहता है।

-नगर निगम: दोनों नगर निगम की सतर्कता शाखा कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति करती हैं। ठेले वालों से मिलीभगत ऐसी होती है कि कार्रवाई से पहले ही ठेले इधर-उधर हो जाते हैं।

कार्रवाई न होने से सज गए सड़क पर बाजार

-गोपालपुरा बाइपास पर स्टूडेंट्स की संख्या देखते हुए ठेलों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती चली गई। त्रिवेणी पुलिया उतरने से गुर्जर की थड़ी अंडर पास तक ठेले सड़क पर ही सजे रहते हैं।

-वैशाली नगर: गांधी पथ कहने को तो नॉन वेंडिंग जोन हैं, लेकिन यहां 100 से अधिक थड़ियां लगती हैं। आम्रपाली सर्किल से नर्सरी सर्किल की ओर जाने पर चाट बाजार लगता है। यहां रोजाना ठेलों की संख्या बढ़ती जा रही है। यही हालत खातीपुरा की है।

-स्टेच्यू सर्कल से पांच बत्ती वाली रोड पर भी बाजार सजता है। यहां शाम को वाहन चालकों का निकलना मुश्किल हो जाता है।

(परकोटा के मुख्य बाजारों से लेकर सोडाला, श्याम नगर, लालकोठी सब्जी मंडी, झोटवाड़ा पुलिया के आस-पास बुरा हाल है। यहां शाम को सड़क पर 15 फीट भी जगह नहीं बचती है।)

सर्वे भी अधूरा, परिचय पत्र भी नहीं दे पाए

-पिछले पांच वर्ष से नगर निगम जयपुर में स्ट्रीट वेंडर्स का सर्वे करवा रहा है, लेकिन वो अब तक पूरा नहीं हो पाया है। थड़ी-ठेला यूनियन के पदाधिकारियों की मानें तो शहर में 80 हजार से अधिक थड़ी ठेले वाले हैं, लेकिन परिचय पत्र 20 हजार को भी जारी नहीं हो पाए हैं।

-हाईकोर्ट के दबाव में नगर निगम ने वेंडिंग जोन तो घोषित कर दिए, लेकिन निगम ने यहां मूलभूत सुविधाएं तक विकसित नहीं की। वेंडिंग जोन में खड़े होने वाले वेंडर्स के ठेले भी नगर निगम कार्रवाई के दौरान उठा ले जाता है।

वेंडिंग जोन बने तो ये होगा फायदा

-ठेलेवालों को वेंडिंग जोन मिल जाएंगे तो वे सहजता से व्यापार कर सकेंगे और अवैध वसूली बंद हो जाएगी।

-जनता की राह सुगम हो जाएगी। ठेलों के सड़क पर नहीं आने से लोगों को होने वाली दिक्कतें कम होंगी।

टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक ही नहीं

कोर्ट के दबाव में नगर निगम ने 180 वेंडिंग जोन तो घोषित किए थे, लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी इन वेंडिंग जोन में कोई सुविधाएं नहीं हैं। वेंडिंग जोन में भी निगम कार्रवाई करता है। टाउन वेंडिंग कमेटी के चुनाव तो हो गए, लेकिन उसकी बैठक हर तीन माह में करने का प्रावधान है, लेकिन कोई ध्यान ही नहीं देता। बैठक हो तो हमारी समस्याओं का समाधान हो।

-बनवारी लाल शर्मा, अध्यक्ष, हैरिटेज थड़ी ठेला यूनियन

जिम्मेदार कर रहे खानापूर्ति

शहर में जब भी कोई वीवीआईपी मूमेंट होता है तो नगर निगम की सतर्कता शाखा जाग जाती है और ठेले वालों पर कार्रवाई शुरू कर देती है। जी-20 सम्मेलन की तैयारियों को देखते हुए कई मुख्य मार्गों पर निगम दस्ते ने कार्रवाई की है।