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दूल्हे ने लौटाया 10 लाख रुपए का दहेज, शगुन में महज नारियल और 1 रुपया लेकर पेश की मिसाल

कुछ युवाओं ने विवाह के शगुन में बतौर एक रुपया स्वीकार कर समाज के सामने नजीर पेश की। वहीं, दहेज प्रथा को दूर करने के साथ ही सादगी से विवाह करने का सामाजिक संदेश भी दिया।

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जयपुर। हाल ही मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी, अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पादुकोण की शाही शादियों ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। डेस्टिनेशन वेडिंग के साथ करोड़ों रुपए के बजट में हुई इन शादियों के उलट शहर के कुछ युवाओं ने विवाह के शगुन में बतौर एक रुपया स्वीकार कर समाज के सामने नजीर पेश की। वहीं, दहेज प्रथा को दूर करने के साथ ही सादगी से विवाह करने का सामाजिक संदेश भी दिया। ऐसा कर इन युवाओं ने परिवार, समाज और शहर के लोगों के लिए आदर्श कायम किया।

कर रहे जागरूक: चित्रकूट निवासी उम्मेद सिंह का विवाह चूरू निवासी मीनाश्री सिंह के साथ हुआ। लग्न-टीके में मीनाश्री के पिता ने छह लाख रुपए दिए, लेकिन दुल्हे ने शगुन में एक रुपया ही लिया। दूल्हे का कहना था कि वह दहेज प्रथा के खिलाफ है और इसके लिए वह औरों को भी जागरूक कर रहे हैं।

उधर, नौ फरवरी को कालवाड़ रोड से अरविंद सिंह शेखावत की बारात रमन विहार गई थी। विवाह के दौरान दुल्हन तनिष्का कंवर के पिता ने दूल्हे को शगुन में 5.51 लाख रुपए दिए। काफी मनुहार के बाद दूल्हे अरविंद व बहनोई ने इसे स्वीकार नहीं किया और बतौर शगुन एक रुपया ही लिया।

रुपया-नारियल लिया
ढोढ़सर (चौमूं) निवासी कमोद कंवर का विवाह 22 जनवरी को बीकानेर निवासी अरविंद सिंह राठौड़ से हुआ था। दुल्हन के पिता पदम सिंह राठौड़ ने टीके में पांच लाख रुपए दिए तो दूल्हे ने लेने से मना कर दिया और नेग में बस एक रुपया-नारियल लिया।

सभी ने की सराहना
सोडाला, स्वेज फॉर्म निवासी बजरंग सिंह की बेटी कुमकुम की शादी कानोता में तय हुई थी। 14 फरवरी को हुए विवाह के दौरान उन्होंने दूल्हे राहुल को शगुन में दस लाख रुपए दिए। दूल्हे ने इन्हें लेने से इनकार कर दिया। दूल्हे की इस पहल की सभी ने सराहना की।

बिना दहेज की शादी
जवाहर सर्किल निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट विनोद शर्मा ने गत 27 जनवरी को हुए विवाह के दौरान शगुन में लाखों रुपए लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने भी बिना दहेज के मंगेतर ज्योति से शादी की।

समिति ने उठाया शादी का बीड़ा
शास्त्री नगर स्थित कब्रिस्तान में प्रशासन की ओर से अतिक्रमण के दायरे में कुछ मकान हटाए गए। इससे वहां प्रजापत समाज के एक परिवार में बेटी ललिता प्रजापत की शादी की तैयारियों पर ब्रेक लग गया। फिर शादी का जिम्मा हरिओम जन सेवा समिति, राजस्थान ने उठाया। महामंत्री पंकज गोयल ने बताया कि पदाधिकारियों ने शादी की सभी जिम्मेदारियां आपस में बांट ली। 10 फरवरी को हुए विवाह के बाद सभी ने बेटी को हंसी-खुशी ससुराल के लिए विदा किया।