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गुरुनानक जयंती: जब मक्का में घूमा काबा तो हुआ कुछ ऐसा…

सिखों के गुरु नानकदेव की शिक्षाएं आज भी प्रेरणादायक

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जयपुर

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Savita Vyas

Nov 13, 2019

गुरुनानक जयंती

गुरुनानक जयंती: जब मक्का में जब घूमा काबा तो हुआ कुछ ऐसा...

जयपुर। गुरु नानक देव की 550वीं जयंती प्रदेश के सभी छोटे-बड़े गुरुद्वारों में मनाई गई। गुरुद्वारों में शबद कीर्तन का दौर चला। गुरुनानक की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। गुरुनानक के जीवन परिचय में एक घटना का जिक्र है, जो सिख और इस्लाम धर्म से जुड़ी है। यह घटना इस बात का संदेश देती है कि हम इंसान चाहे किसी भी नाम और रूप में उस परम शक्ति की पूजा करें, लेकन वह शक्ति तो एक ही है।


एक पौराणिक कथा के अनुसार गुरु नानक देव ने अपने शिष्य मरदाना के साथ करीब 28 वर्षों में दो उपमहाद्वीपों में पांच प्रमुख पैदल यात्राएं की थीं। जिन्हें उदासी कहा जाता है। इन 28 हजार किलोमीटर लंबी यात्राओं में गुरु नानक ने करीब 60 शहरों का भ्रमण किया। गुरु नानक जी का एक शिष्य मुस्लिम था। उसका नाम मरदाना था। मरदाना ने जब गुरु नानक से मक्का जाने की इच्छा जाहिर की तो गुरु नानक देव ने इसका कारण जानना चाहा, तब मरदाना ने बताया कि ऐसा माना जाता है कि जब तक एक मुसलमान मक्का नहीं जाता तब तक वह सच्चा मुसलमान नहीं कहलाता है। इसके बाद गुरुनानक देव ने हाजी का भेष धारण कर लिया और अपने शिष्यों के साथ मक्का पहुंच गए। काफी दिनों की यात्रा के बाद जब गुरुनानक देव मक्का पहुंचे तो वह थक गए। वहां पर हाजियों के लिए एक आरामगाह बनी हुई थी, वहां पहुंचकर गुरुनानक देव मक्का की तरफ पैर करके लेट गए।
हाजियों की सेवा करने वाला खातिम जियोन यह देखकर बहुत गुस्सा हुआ और गुरुनानकदेव से बोला- क्या तुमको दिखता नहीं है कि तुम मक्का मदीना की तरफ पैर करके लेटे हो। इस पर गुरु नानक ने कहा कि वह बहुत थके हुए हैं और आराम करना चाहते हैं। उन्होंने जियोन से कहा कि जिस तरफ खुदा न हो उसी तरफ उनके पैर कर दें। क्रोध में जियोन ने गुरु नानक के पैर मक्का की दूसरी ओर कर दिए। इसके बाद जैसे ही उसने सिर उठाया तो काबा उसी दिशा में आ गया। जियोन ने कई बार गुरुनानक के पैरों की दिशा बदली और बार—बार काबा उस दिशा में मुड़ गया। यह देखकर जियोन को गुरु नानक की बात समझ में आ गई कि खुदा केवल एक दिशा में नहीं बल्कि हर दिशा में है। इसके बाद जियोन को गुरु नानक ने समझाया कि अच्छे कर्म करो और खुदा को याद करो, यही सच्चा सदका है।

यहां मिलता है यात्रा का उल्लेख
गुरु नानक की मक्का यात्रा का विवरण कई ग्रन्थों और ऐतिहासिक किताबों में मिलता है। 'बाबा नानक शाह फकीर' में हाजी ताजुद्दीन नक्शबन्दी ने लिखा है कि वह गुरु नानक से हज यात्रा के दौरान ईरान में मिले थे। जैन-उ-लबदीन की लिखी 'तारीख अरब ख्वाजा' में भी गुरु नानक की मक्का यात्रा का उल्लेख मिलता है। हिस्ट्री ऑफ पंजाब, हिस्ट्री ऑफ सिख, वारभाई गुरदास और सौ साखी, जन्मसाखी में भी नानक की मक्का यात्रा के बारे में बताया गया है।


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