
हैंडसम, हाई पैकेज...फिर भी कुंवारे घूम रहे NRI! ai image
सविता व्यास
जयपुर। कभी भारतीय शादी के बाजार में 'अमरीकी एनआरआई दूल्हा' सबसे बड़ा स्टेटस सिंबल माना जाता था। लेकिन अब यह चमक फीकी पड़ रही है। जयपुर की नेहा (नाम परिवर्तित) की कहानी इसका जीता-जागता उदाहरण है, जिसकी शादी एनआरआई दूल्हे के युद्ध क्षेत्र के पास फंसे होने के कारण ऐन वक्त पर टूट गई। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष, सख्त इमिग्रेशन नीतियां और विदेशों में बढ़ती असुरक्षा ने अब भारतीय परिवारों को 'मेड इन इंडिया' दूल्हों की ओर लौटने पर मजबूर कर दिया है।
विदेशी दूल्हों का ठप्पे से लोगों का मोहभंग
वीसावर्ज (VisaVerge) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अब युवा शादी के लिए जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं। पहले जहां 20-25 साल में शादी तय हो जाती थी, अब औसत उम्र बढक़र 29 साल हो गई है। मध्यम वर्गीय परिवारों का मानना है कि भारत में जो सामाजिक सुरक्षा और आजादी है, वह विदेश में नहीं। अब बेटियां 'स्टेटस' के लिए समझौते करने के बजाय करियर और मानसिक अनुकूलता को तवज्जो दे रही हैं। वीसावर्ज रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शादियों में अब 'विदेशी टैग' के बजाय सुरक्षा और स्थिरता को प्राथमिकता दी जा रही है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि अमरीकी एनआरआई दूल्हों की मांग में 25% की भारी गिरावट आई है।
डिमांड घटने के 3 मुख्य कारण-
सख्त इमिग्रेशन नीतियां : एच-1बी (H-vB) वीजा नियमों में बार-बार बदलाव और 'ट्रंप इफेक्ट' का डर।
- आर्थिक अनिश्चितता : नौकरी जाने की स्थिति में 60 दिनों के भीतर देश छोडऩे का दबाव।
- सुरक्षा संकट : वैश्विक युद्ध (यूक्रेन-रूस, मिडिल ईस्ट) के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्राओं और जीवन की असुरक्षा।
अमरीका नहीं, ऑस्ट्रेलिया-सिंगापुर पहली पसंद
अमरीका में जीवनसाथी के कार्य अधिकारों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने परिवारों को डरा दिया है। अब भारतीय युवतियां उन देशों को प्राथमिकता दे रही हैं, जहां इमिग्रेशन नियम सरल हैं और पत्नी को भी नौकरी के बेहतर अवसर मिलते हैं। इस मामले में अब ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और सिंगापुर जैसे देश अमरीका के मुकाबले पहली पसंद बनकर उभरे हैं।
'नोवेयर ब्राइड्स' का कड़वा सच और कानूनी सख्ती
लॉ कमीशन और विदेश मंत्रालय (MEA) की चेतावनियों ने भी परिवारों को सतर्क किया है। 'हॉलिडे मैरिज' के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी एक बड़ा खतरा है, जहां एनआरआई पति दहेज लेकर पत्नी को बेसहारा छोड़ देते हैं। राज्यसभा के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में एनआरआई पतियों द्वारा पत्नियों को छोडऩे की 1,617 आधिकारिक शिकायतें दर्ज हुईं। देश में करीब 40 हजार से अधिक महिलाएं ऐसी शादियों में धोखाधड़ी का शिकार हो चुकी हैं।
उत्पीडऩ पर सरकार हुई थी सख्त
देश में 1990 के दशक के बाद एनआरआई शादियों का चलन तेजी से बढ़ा। हालांकि समय के साथ एनआरआई पतियों द्वारा उत्पीडऩ की शिकायतें भी सामने आने लगीं। इन पर रोक लगाने के लिए सरकार ने 2019 में 'विवाह पंजीकरण विधेयक' पेश किया, जिससे अब एनआरआई शादियों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य और सख्त हो गया है।
Updated on:
13 Apr 2026 03:36 pm
Published on:
13 Apr 2026 03:33 pm
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