
फोटो पत्रिका नेटवर्क
जयपुर। राजस्थान एटीएस द्वारा आंतरिक सुरक्षा और साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की गई है। एटीएस की जयपुर यूनिट को मिली गुप्त सूचना के आधार पर हनुमानगढ़ जिला पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए भादरा कस्बे में एक अवैध आधार सेंटर पर छापेमारी कर फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।
एडीजी (ATS-AGTF) दिनेश एमएन ने बताया कि फर्जी बायोमेट्रिक्स से आधार कार्ड बनाने के मामले में मास्टरमाइंड कुलदीप शर्मा को गिरफ्तार किया गया है। भादरा (हनुमानगढ़) में नगर पालिका के पास एक अवैध आधार कार्ड बनाने का सेंटर खोल रखा था। एटीएस जयपुर के सहायक उपनिरीक्षक कुलवीर सिंह और हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार को इनपुट मिला था कि भादरा में आर्य समाज धर्मशाला के पास एक सेंटर पर तरीके से आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं, जिसका उपयोग साइबर क्राइम एवं राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में किया जा रहा है।
पुष्टि के बाद एटीएस की टीम ने भादरा पुलिस की टीम को साथ लेकर सेंटर पर दबिश दी, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। आरोपी कुलदीप शर्मा अन्य व्यक्तियों जसवंत और आमिर खां की ऑपरेटर आईडी का अवैध उपयोग कर रहा था। पुलिस को मौके से लाल और सफेद रंग के रबर पर बने 'डमी फिंगरप्रिंट' मिले, जिनका उपयोग लॉगिन के लिए किया जाता था। आरोपी ने कागज पर आंखों की रेटिना की फोटो प्रतियां रखी हुई थीं, जिन्हें आईरिस डिवाइस के सामने रखकर बायोमेट्रिक सिस्टम को चकमा दिया जाता था। एनरोलमेंट रसीदों पर जसवंत और आमिर खां के फर्जी हस्ताक्षर भी आरोपी खुद कर रहा था।
पुलिस और एटीएस की जांच में सामने आया कि फर्जी तरीके से बनाए गए आधार कार्ड का उपयोग राष्ट्र विरोधी गतिविधियों, फर्जी सिम कार्ड जारी करवाने और साइबर अपराधों के लिए फर्जी बैंक खाते खुलवाने में किया जा सकता था। पुलिस ने मौके से एक लैपटॉप, प्रिंटर, आईरिस डिवाइस, पाम फिंगरप्रिंट डिवाइस, जीपीएस डिवाइस, फिंगरप्रिंट डाई, कैमरा और आरोपी का मोबाइल जब्त किया है। आरोपी कुलदीप शर्मा के खिलाफ बीएनएस और आईटी एक्ट की सम्बंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे का अनुसंधान भिरानी थानाधिकारी लखवीर सिंह को सौंपा गया है।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी कुलदीप शर्मा से एटीएस और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ में उन लोगों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं जिन्होंने इस फर्जीवाड़े के जरिए आधार कार्ड बनवाए हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह के तार किसी अंतरराज्यीय नेटवर्क या संगठित साइबर अपराधियों से जुड़े हुए हैं। आरोपी के मोबाइल और लैपटॉप के डेटा का फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पिछले रिकॉर्ड्स खंगाले जा सकें।
Published on:
17 Apr 2026 05:52 pm
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