Happy Diwali 2019: इन दिनों हर तरफ दिवाली का ( lakshmi puja 2019 ) जश्न है और इस जश्न के बीच पटाखों की आवाज सुनाई देंने लगी है । लेकिन इस दिवाली हमे पटाखों की आवाज के साथ उससे होने वाले नुकसान के बारे में भी सौचना होंगा । ( diwali subh muhurat ) बच्चों के लिए ( diwali puja vidhi ) दिवाली का मतलब ही होता है मिठाई और पटाखे, लेकिन बढ़ते पलूशन के कारण अगर हम पटाखों से तौबा कर लें या फिर ऐसे पटाखें चलाए जिनसे पर्यावरण को नुकसान ना हो तो ये हमारे और पर्यावरण के लिए बेहतर होगा।
क्या हैं ग्रीन पटाखे
ग्रीन पटाखे दिखने, जलाने और आवाज के मामले में ट्रडिशनल पटाखों जैसे ही होते हैं, लेकिन इन्हें जलाने पर पलूशन 30-40 फीसदी तक कम होता है। खास बात यह है कि ये पटाखे सिर्फ हमारे देश में ही तैयार किए गए हैं, दूसरे किसी देश में ये नहीं मिलते। इन पटाखों को नैशनल इन्वाइरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट (NEERI) ने तैयार किया है। जहां आम पटाखों को जलाने पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली नाइट्रोजन और सल्फर जैसी गैसें ज्यादा निकलती हैं, वहीं ग्रीन पटाखों में ये कम मात्रा में निकलती हैं। इससे इन्वाइनमेंट को नुकसान कम पहुंचता है।
पटाखों से नुकसान
पटाखों से सबसे ज्यादा नुकसान उन बुजुर्ग लोगों को होता है, जो उम्र के पड़ाव में तमाम बीमारियों से घिरे होते हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए तो पटाखे किसी विनाशकारी हथियार से कम नहीं हैं। पटाखों से सल्फर डाइआक्साइड और नाइट्रोजन डाइआक्साइड आदि हानिकारक गैसें हवा में घुल जाती हैं। जो हमारे शरीर के लिए नुकसानदेह होती हैं।
पटाखों की स्मॉग से दमा पीड़ितो को स्वास लेने में काफी दिक्कते होती है । सामान्य व्यक्ति को भी पटाखों सांस फूलने, घबराहट, खांसी, हृदय और फेफड़े संबंधी दिक्कतें, आंखों में संक्रमण, दमा का अटैक, गले में संक्रमण आदि के खतरे होते हैं। आतिशबाजी के दौरान दमा और दिल के मरीजों को काफी सावधानियां रखनी पड़ती है । आतिशबाजी के दौरान रक्तचाप, नाक की एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे बढ़ जाते हैं।