5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यह हैं राजस्थान के जैकी चैन, कुंग-फू देख चौंक जाएंगे आप!

मण्डोर जसवंत सागर निवासी प्रदीप देवड़ा, जिन्होंने पारंपरिक कुंग-फू के लिए विश्व में प्रसिद्ध चीन के हेनान प्रांत स्थित शाउलिन टेम्पल (बौद्ध मठ) में कुंग-फू की कलाएं सीखी।

2 min read
Google source verification

image

Harshwardhan Singh Bhati

Apr 10, 2016

pradeep deora

pradeep deora

दुनिया में मशहूर फिल्म स्टार जैकी चैन को कौन नहीं जानता, वही जैकी चैन जिन्होंने कुंग-फू कला के दम पर दुनिया में नाम कमाया और फिल्मों में छा गए। इसी प्रकार के जैकी चैन राजस्थान के जोधपुर में भी हैं, जिन्होंने संघर्षों और हालातों से जूझते हुए अपना एक अलग मुकाम बनाया।

ये हैं मण्डोर जसवंत सागर निवासी प्रदीप देवड़ा, जिन्होंने पारंपरिक कुंग-फू के लिए विश्व में प्रसिद्ध चीन के हेनान प्रांत स्थित शाउलिन टेम्पल (बौद्ध मठ) में कुंग-फू की कलाएं सीखी। शाउलिन टेम्पल में कुंग-फू की ट्रेनिंग लेने वाले प्रदीप राजस्थान के एकमात्र मार्शल आर्ट खिलाड़ी हैं।

जुलाई में अमरीका में होने वाली अन्तरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए भी प्रदीप का चयन हुआ है। प्रदीप ने मार्शल आर्ट से प्रेरित बॉलीवुड फिल्म वॉरियर सावित्री में भी भूमिका निभाई है।

बचपन से ही जुनून

प्रदीप ने बताया कि कुंग-फू सीखने का बचपन से ही जुनून था। घर के पीछे बने मैदान में आर्मी वालों को कुंग-फू की प्रैक्टिस करते देख जुनून और बढ़ गया। उन्होंने कुंग-फू सीखने की ठानी। इसके अलावा कुंग-फू से प्रेरित फिल्में और बालीवुड फिल्म स्टार अक्षय कुमार के स्टंट को देखकर भी प्रभावित हुए।

हर कला को सीखा

प्रदीप ने बताया कि कुंग-फू सीखने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की। इसके लिए उन्होंने मार्शल आर्ट के अंतर्गत आने वाली विभिन्न विधाएं जूडो, कराटे, वूशू, जिम्नास्टिक और फाइट सीखी। साथ ही कराटे में ब्लैक बेल्ट लिया। इसके साथ ही, मार्शल आर्ट से जुड़ी एडवांस ट्रेनिंग, जिसमें चोई क्वांग दो, मिक्स मार्शल आर्ट, कराटे की एक टेक्निक ताइची विंगचुंग सहित अन्य विधाओं की ट्रेनिंग ली। इसके अलावा उन्होंने देश में असम, चण्डीगढ़, दिल्ली के अलावा जोधपुर में गर्मी की छुट्टियों के दौरान लगने वाले शिविरों में भी भाग लिया और अपनी कला को निखारा।

कड़ी मेहनत से पाया मुकाम

प्रदीप ने बताया कि कुंग-फू की ट्रेनिंग लेने के लिए वह चीन के हेनान प्रांत के डैंगपेंग सिटी के शाउलिन टेम्पल गए, वैसी ट्रेनिंग दुनिया में कही नहीं होती और वहां एडमिशन भी मुश्किल से मिलता है। इस ट्रेनिंग के लिए भारत से केवल 9 खिलाडि़यों का चयन हुआ, जिसमें राजस्थान से एकमात्र प्रदीप ही हैं।

उन्होंने बताया कि बहुत ही कठोर ट्रेनिंग दी गई, जिनमें पहाड़ों पर दौडऩा, हाथों के बल सीढि़यां उतरना, दो अंगुलियों पर पुशअप्स करना, हाथों की मजबूती के लिए पेड़ों को मारना, अंगुलियों की मजबूती के लिए पेड़ों में गड्ढे करना, वेपन ताउलो सहित विभिन्न दावपेंच शामिल हैं। प्रदीप दिन में 7-8 घंटे प्रैक्टिस करते हैं।

संघर्षो का सामना किया

प्रदीप ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। पिता किराने की दुकान चलाते हैं, माता गृहिणी हैं। इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी। आज भी वे जोधपुर में बच्चों, बालिकाओं आदि को आत्मरक्षा के गुर सिखा रहे हैं। साथ ही, गरीबों को निशुल्क सिखाते हैं। प्रदीप का सपना जोधपुर में मार्शल आर्ट स्कूल खोलकर आत्मरक्षा की इस कला का प्रचार-प्रसार करना है।

ये भी पढ़ें

image