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स्वास्थ्य विभाग की फाइलें गुम, केस दर्ज कराने वाले अधिकारी ही जांच के घेरे में

एनएमएचपी के नोडल अधिकारियों के खिलाफ होगी विभागीय जांचसूचना आयोग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को दिए एक माह में जांच के आदेश

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ओमप्रकाश शर्मा
जयपुर . स्वास्थ्य विभाग के अधीन चल रहे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में भर्ती और नियुक्तियों के साथ खरीद की कई महत्वपूर्ण फाइलें तीन साल से गुम हैं। रिपोर्ट दर्ज कराने वाले अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानते हुए पुलिस ने कार्यक्रम के नोडल अधिकारियों सहित अन्य के खिलाफ विभागीय जांच की आवश्यकता जताई है। यह तथ्य सामने आने पर सूचना आयोग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) को इन अधिकारियों के खिलाफ एक माह में जांच करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश एक अपील की सुनवाई में दिया गया है।
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनएमएचपी) की ये फाइलें फरवरी 2021 से गायब बताई जा रही हैं। इनमें भर्ती, उपकरणों की खरीद, कर्मचारियों की नियुक्ति, कार्यक्रम संचालन प्रक्रि या तथा प्रशिक्षण सबंधी फाइलें शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण फाइल भर्ती से जुड़ी हंै, जिसकी प्रक्रिया अन्तिम चरण में बताई जा रही है। फाइलों के गुम होने का मामला पहली बार तब सामने आया जब तत्कालीन नोडल अधिकारी डॉ. महेन्द्र शर्मा ने फरवरी 2021 को खोज पत्र जारी किया था। इसके बाद तत्कालीन नोडल अधिकारी डॉ. सुनील शर्मा ने जनवरी 2022 में डीसीपी (ईस्ट) को पत्र लिख कर फाइलें चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज करने की गुहार की।
मामले की जांच ट्रांसपोर्ट नगर थाने को दी गई। जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल राजवीर ने नवम्बर 2022 को रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया कि एनएमएचपी के तत्कालीन नोडल अधिकारी डॉ. प्रदीप शर्मा की मृत्यु के बाद वर्ष 2020 में कार्यभार डॉ. महेन्द्र शर्मा को दिया गया। इसके बाद पत्रावलियों की जो सूची बनी थी उसमें गुम बताई गई फाइलें अंकित थी। जांच अधिकारी ने माना कि इसके एक साल चार माह बाद रिपोर्ट दूसरे अधिकारी ने दर्ज कराई। ऐसे ही तर्क देते हुए जांच अधिकारी ने रिपोर्ट में लिखा है कि डॉ. मेहन्द्र शर्मा, डॉ. सुनील शर्मा, डॉ. गुंजन सोलंकी, डॉ. विरेन्द्र सिंह, पंकज शर्मा, ललित त्रिपाठी व अन्य के खिलाफ विभागीय जांच की जाए।
एसीएस को दिए जांच के निर्देश
इन्हीं फाइलों की सूचना को लेकर दायर अपील पर सूचना आयोग ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। परिवादी नितेश शर्मा की ओर से पुलिस जांच रिपोर्ट का तथ्य पेश करने के बाद मुख्य सूचना आयुक्त डीबी गुप्ता ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) को निर्देश दिया कि प्रकरण में जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ एक माह में कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यह भी निर्देश दिए कि जांच रिपोर्ट की प्रतिलिपि आयोग व परिवादी को उपलब्ध कराई जाए।