
बिना चीर-फाड़ के गंभीर मरीज का बदला हार्ट वॉल्व
जयपुर . भारत में माइट्रल रिगर्जेटेशन से पीडि़त मरीजों के हॉर्ट वॉल्व की मरम्मत के लिए क्लिप डिलीवरी सिस्टम लॉन्च किया गया है। इससे डॉक्टरों को मरीजों ( Patients ) की जिंदगी बचाने के इलाज का विकल्प मुहैया कराकर एक तकनीक उनके हाथों में सौंप दी है। हार्ट ( Heart ) में खराबी या हार्ट फेलियर ( Heart Failure ) के कारण माइट्रल रिगर्जेटेशन से पीडि़त मरीजों के लिए इस डिवाइस का इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह क्लिप डिवाइस माइट्रल वॉल्व की मरम्मत बिना ओपन हार्ट सर्जरी के करता है और इसे पैर की नस से दिल में पहुंचाया जाता है। यह डिवाइस माइट्रल वॉल्व की कमियों को दुरुस्त कर रक्त को ह्रदय के पीछे बहने (माइट्रल रिगर्जेटेशन या एमआर) से रोकता है। यह ऑक्सीजन युक्त ब्लड को पंप करने की दिल की क्षमता को बरकरार रखता है। आज तक इस प्रॉडक्ट से दुनिया भर में एमआर से पीडि़त एक लाख से ज्यादा मरीजों का इलाज करने में मदद मिली है।
भारत में एबॅट के स्ट्रक्चरल हार्ट डिविजन की जनरल मैनेजर पायल अग्रवाल ने बताया कि हार्ट वॉल्व और चैंबर की गड़बडिय़ों ने, जिन्हें स्ट्रक्चरल हार्ट कंडीशन कहा जाता है, दुनियाभर में लाखों लोगों को प्रभावित किया है। कार्डियोलोजिस्ट डॉ. रविन्दर सिंह राव ने बताया कि बायें वेन्ट्रीकुलर के कमजोर फंक्शन के साथ माइट्रल रिगर्जेटेशन (एमआर) का निदान भी कमजोर होता है। अकेले दवाईयां इस यांत्रिक समस्या से बचाव नहीं कर सकती हैं और इनसे सिर्फ ये मदद मिलती है कि हार्ट इसे बेहतर ढंग से सहन कर सके। ओपन हार्ट सर्जरी में कुछ मरीजों को खतरा होता है। क्लिप कैथेटर से बिना ऑपरेशन केमाइट्रल वॉल्व की मरम्मत करने में मदद करती है।
Published on:
19 Nov 2020 03:14 pm
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