
राजस्थान में कैसा राज, बिना 'मंत्रिमंडल' के शहरी सरकार ने निकाल दिए दो साल
Nagar Nigam Jaipur: जयपुर। नवगठित हेरिटेज नगर निगम की प्रथम महापौर मुनेश गुर्जर का 10 नवम्बर को दो साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। हैरिटेज शहर की शहरी सरकार ने दो साल बिना 'मंत्रिमंडल' यानी संचालन समितियों के निकाल दिया। दो साल में साधारण सभा (बोर्ड बैठक) भी एक ही हो पाई। हकीकत यह है कि शहर के विकास को लेकर अब पार्षद ही मुखर होने लगे है। संचालन समितियों के गठन और बोर्ड बैठक को लेकर पार्षदों का विरोध भी सामने आने लगा है।
कांग्रेस सरकार ने शहर के विकास के लिए जयपुर में दो नगर निगमों का गठन किया। 25 साल के निगम के इतिहास में जयपुर पहली बार कांग्रेस का बोर्ड बना है। सरकार ने जयपुर के 5 विधानसभा क्षेत्रों हवामहल, आमेर, किशनपेाल, आदर्श नगर और सिविल लाइंस क्षेत्र को 100 वार्डों में बांटकर हैरिटेज नगर निगम बनाया। सरकार का तर्क था कि दो निगम बनाने से शहर का बेहतर विकास होगा। सरकार का यह निर्णय अब उसके ही गले की फांस बन गया है। दो साल में हैरिटेज नगर निगम में संचालन समितियों का गठन नहीं हो पाया है। 90 दिन तक महापौर मुनेश गुर्जर संचालन समितियों का गठन नहीं कर पाई। इसके बाद समितियों के गठन का मामला सरकार के पाले में चला गया।
विधायकों में एकराय नहीं!
जानकारों का कहना है हैरिटेज नगर निगम क्षेत्र के 5 विधायकों में चार एमएलए कांग्रेस से है, जिनमें दो सरकार में कैबिनेट मंत्री भी है। इनमें हवामहल क्षेत्र से मंत्री महेश जोशी, सिविल लाइंस क्षेत्र से मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास के अलावा आदर्श नगर से विधायक रफीक खान और किशनपोल से विधायक अमीन कागजी है। जानकारों की मानें तो इन चारों विधायकों में हैरिटेज नगर निगम में संचालन समितियों के गठन को लेकर एकराय नहीं बन रही है।
महापौर का तर्क, सरकार को भेज रखा प्रस्ताव
हैरिटेज नगर निगम में संचालन समितियों के गठन मामले को लेकर महापौर मुनेश गुर्जर का तर्क है कि समिति गठन का मामला सरकार के स्तर पर होेना है, इसे लेकर सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेज रखा है। अब संचालन समितियों के गठन का निर्णय सरकार के स्तर पर होना है।
चार बार उठ चुकी मांग, नहीं बनी कमेटियां
हैरिटेज नगर निगम में कमेटियां गठन करने को लेकर कांग्रेस के साथ निर्दलीय पार्षद 4 बार मांग कर चुके है, लेकिन पिछले दो साल में कमेटियों का गठन नहीं हो पाया है। कमेटी गठन की मांग को लेकर पार्षद कई बार धरना—प्रदर्शन भी कर चुके है। हर बार कांग्रेस के विधायक आपस में चर्चा कर जल्द कमेटियां घोषित करने की कहकर मामले को शांत कराते आए है।
— अप्रेल 2021 में पहली बार मांग उठी तो काेराेना संक्रमण काल में बैठकें नहीं बुलाने की कहकर मामले काे टाला
— जनवरी 2022 में दूसरी बार मांग उठी, तब केबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और विधायक रफीक खान के उत्तर प्रदेश चुनावी दौरे को लेकर मामले को टाला गया।
— फरवरी 2022 तीसरी बार संचालन समितियों की मांग उठी, उस समय सरकार में राजनीतिक नियुक्तियों का मामले को लेकर टाल दिया गया।
— मार्च 2022 में फिर संचालन समितियों के गठन की मांग उठी, लेकन विधानसभा का बजट सत्र चलने से कमेटिया नहीं बन पाई
अब फिर उठी मांग
संचालन समितियां नहीं बनाने और वार्डों में विकास कार्य नहीं होने को लेकर कांग्रेसी और निर्दलीय पार्षद एक दिन पहले मंगलवार को एकजुट हुए। गुरूनानक जयंती का अवकाश हाेने के बाद भी करीब 19 पार्षद एकजुट होकर निगम मुख्यालय पहुुंचे। यहां पार्षद कुछ देर के लिए धरने पर बैठे और प्रदर्शन किया।
बोर्ड बैठक भी नहीं...
राजस्थान नगर पालिका अधिनियम के तहत हर 60 दिन में एक बार बोर्ड बैठक बुलाने का नियम है, लेकिन हैरिटेज नगर निगम बोर्ड को बने 2 साल हो रहे है। इस बीच सिर्फ एक ही बोर्ड बैठक बुलाई गई, वह भी बजट बैठक थी। एक बार बोर्ड बैठक नहीं बुलाने से सरकार ने बजट पास किया।
हैरिटेज निगम में बहुमत का गणित
— 100 वार्ड है हैरिटेज नगर निगम में
— 48 पार्षद है कांग्रेस पार्टी के
— 41 पार्षद है भाजपा के
— 11 निर्दलीय पार्षद है
Updated on:
09 Nov 2022 02:28 pm
Published on:
09 Nov 2022 02:25 pm
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