मुंह चिढ़ा रहा यह निर्माण: गंगापोल को संवारने का काम शुरू हो गया है। लेकिन, परिसर में अधूरे बने पार्षद कार्यालय को अब तक नहीं हटाया गया। निगम अधिकारियों ने राजनीतिक दबाव के कारण इसका निर्माण करवाना शुरू कर दिया था। जबकि, नया निर्माण परकोटे में इस तरह नहीं किया जा सकता।
जयपुर. विश्व विरासत परकोटा बचाने के लिए राज्य सरकार ने हैरिटेज नगर निगम का गठन किया, लेकिन निगम के जिम्मेदार अधिकारी अपने मूल काम को ही भूल गए हैं। मुख्य सचिव उषा शर्मा की सख्ती के बाद हैरिटेज नगर निगम ने अवैध निर्माणों पर कार्रवाई शुरू की, लेकिन उसमें भी दिखावा ज्यादा नजर आ रहा है। क्योंकि एमआइ रोड पर सर्वे के बाद टीम ने कोई कार्रवाई नहीं की जबकि, वहां मूलस्वरूप से छेड़छाड़ कर धड़ल्ले से निर्माण हो रहे हैं।
दरअसल, निगम के तीन जोन में अवैध निर्माण की सूची बनाई गई। 53 अवैध निर्माण मिले। 15 सितम्बर को बैठक में आयुक्त विश्राम मीना ने इन पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। सूची होने के बाद भी जोन अधिकारी अब तक महज 10 अवैध निर्माण ही सील कर पाए हैं।
इन पर कोई अमल नहीं
-परकोटे के बाजारों में अतिक्रमण पसरा है। बरामदों में चलना मुश्किल हो गया है। इनको हटाने के लिए निगम की कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है।
-दो नो व्हीकल जोन परकोटे में इसलिए बनाए जाने थे ताकि सैलानी यहां की कला और संस्कृति को समझ सकें। लेकिन, दो साल में एक भी ऐसा स्थान नहीं बन पाया।
-सुगम यातायात के लिए प्लान बनाना था, लेकिन विश्व विरासत परकोटे में अब तक इस पर कोई काम ही नहीं हुआ।
-मुख्य बाजारों के फसाड वर्क में निगम एकरूपता भी नहीं रख पाया। जबकि, पिछले तीन वर्ष से काम चल रहा है। मुख्य बाजारों में ही कई जगह अवैध निर्माण हो रहे हैं।
नियमित होगी कार्रवाई
विश्व विरासत से जो लोग खिलवाड़ कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जहां तक एमआइ रोड की बात है, वहां भी कुछ निर्माणकर्ताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। जोन उपायुक्त परीक्षण कर रहे हैं। कार्रवाई की जाएगी।
-विश्राम मीना, आयुक्त, हैरिटेज नगर निगम