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हे सरकार ! अच्छा है डेढ़ साल में 500 ने भी नहीं लिए 25 लाख, इन बच्चों को जरूरत है…इन्हें दे दो…

वास्तविकता यह ... बीमा में 25 लाख क्लेम के चंद मामले आ रहे, जिनको जरूरत उनके लिए पैकेज ही नहीं दुर्लभ बीमारियों के बच्चों के लिए चिरंजीवी में भी एक पैसा नहीं दे रही सरकार

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जयपुर

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Vikas Jain

Sep 13, 2023

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विकास जैन


जयपुर. चिरंजीवी बीमा के जरिये राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों में 25 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज का दावा किया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर दुर्लभ बीमारियों से ग्रस्त जिन बच्चों को लाखों रुपए के इलाज की जरूरत है, उनके लिए सरकार हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद भी बजट प्रावधान नहीं कर रही है।
चिरंजीवी के तहत 18 महीने में करीब 500 मरीजों ने ही 5 लाख से अधिक राशि का इलाज करवाया है। 1.40 करोड़ परिवारों का बीमा इस योजना के तहत अब तक हो चुका है।

पॉलिसी वर्ष 2022-23 में 5 लाख से अधिक व्यय के 273 लाभार्थी और पॉलिसी वर्ष 2023-24 में 5 लाख से अधिक व्यय के करीब 175 लाभार्थियों को कैशलेस उपचार का लाभ दिया गया है। राज्य सरकार ने गत वर्ष एक अप्रेल से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आमजन को संपूर्ण नि:शुल्क चिकित्सा की सौगात दी। जिसके तहत सरकारी अस्पतालों में सभी दवाइयां और सर्जरी की सुविधा नि:शुल्क दी जा रही है। लेकिन यह सुविधा सौगात दुर्लभ रोग ग्रस्त मरीजों के लिए संजीवनी साबित नहीं हो रही।

पड़ती है महंगे इंजेक्शनों की जरूरत

राजधानी जयपुर में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, स्पाइन मस्कुलर डिस्ट्रॉपी समेत करीब 40 से 50 तरह के दुर्लभ रोगों से ग्रस्त मरीज हर समय इलाज करवा रहे होते हैं। इन मरीजों में ज्यादातर बच्चे हैं। इनका जेकेेलोन अस्पताल मेें इलाज भी चल रहा है। इनमें से कुछ बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें करोड़ों रुपए के इंजेक्शन की जरूरत है। उनके परिजन इंजेक्शन का इंतजाम करने में भी असमर्थ हैं। उन्होंने राज्य व केंद्र सरकार से भी मदद मांगी, फिर भी उनकी हाल जस के तस बने हुए हैं।

स्पेशल केस में तो हमेशा देती हैं सरकारें

दुर्लभ बीमारियों के मरीजों को भी स्पेशल केस ही माना जाता है। इन्हें ऐसी बीमारियां होती हैं जो दुनिया में चंद लोगों को होती है। राजस्थान के विभिन्न सरकारें जटिल बीमारी व निर्धन लोगो के इलाज में पहले से ही शिथिलता बरतती आई है। जिन्हें मुख्यमंत्री सहायता कोष, मुख्यमंत्री राहत कोष से इलाज की राशि स्वीकृत की जाती रही है। लेकिन अब चिरंजीवी बीमा में भी इन्हें शामिल नहीं किया गया। जबकि इस तरह के मामले चंद ही हैं। ना ही निरोगी राजस्थान के तहत इन्हें नि:शुल्क किया गया है।

इलाज में हो गया 15 लाख का कर्जा

गंभीर बीमारी से ग्रसित 15 वर्ष आयु के सुशील कुमार वैष्णव के पिता रमेशचंद्र ने बताया कि सरकार ने चिरंजीवी योजना का दायरा बढ़ा कर 25 लाख रुपए कर दिया, लेकिन बच्चे के लिए आज तक किसी प्रकार की मदद नही मिली। बच्चे का इलाज कराने में 15 लाख रुपए का कर्ज हो गया है। इसके चलते भाई ***** की पढ़ाई छूट चुकी है और परिवार दाने-दाने के लिए तरस रहा है।

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