
जयपुर. गोविंदगढ़ में 15 साल पहले 4 लोगों की मौत के मामले में राज्य सरकार को झटका लगा है। हाईकोर्ट ने मामले में दोषी ठहराए मृतक दंपती के बेटे को दोष मुक्त कर दिया है। जबकि राज्य सरकार ने मामले में मृत्युदंड की गुहार लगाते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। मामले में दोषी राजेंद्र कुमार को एडीजे कोर्ट चौमूं ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
गोविंदगढ़ थाना इलाके में 13 सितंबर 2008 के दिन छीतरमल, उनकी पत्नी चंदा और बेटे सुरेश व शुभकरण के शव कमरे में मिले थे। पुलिस ने मृग दर्ज कर जांच शुरू की। छीतरमल के रिश्तेदार मोहनलाल शर्मा सहित अन्य की लिखित रिपोर्ट पर पुलिस ने चारों की हत्या के आरोप में राजेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया। पुलिस ने चार्जशीट में कहा था कि राजेंद्र मेडिकल से संबंधित काम करता था।
उसने चारों के पीलिया का टीका लगाने के नाम पर जहर का इंजेक्शन लगाकर हत्या कर दी। पुलिस ने इंजेक्शन की सीरीज, कैनूला, खाली बोतल सहित अन्य सामान भी कोर्ट में पेश किया। जिसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने राजेंद्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। ट्रायल कोर्ट के फैसले को सरकार ने फांसी में बदलने के लिए अपील दायर की। वहीं दोषी की ओर से भी आरोपमुक्त करने के लिए अपील दायर की गई।
ये रहीं पुलिस जांच में कमियां
दोषी के वकील राजेश कुमार शर्मा ने कोर्ट को बताया कि राजेंद्र के मोबाइल की लोकेशन का रिकार्ड पेश नहीं किया गया। पुलिस ने केवल कुछ लोगों की बातों को आधार बनाकर चालान पेश कर दिया जबकि वे ट्रायल के दौरान पक्षद्रोही हो गए थे। पुलिस ने जिनसे जानकारी मिलने का दावा किया, उन्होंने जबरन बयान लिखने के आरोप लगाए। कैनुला व इंजेक्शन की एफएसएल जांच में जहरीली दवा के अंश नहीं मिले। पुलिस हत्या का कारण भी साबित नहीं कर सकी। जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने बरी करने के आदेश दिए।
Published on:
25 Apr 2023 02:53 pm
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