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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने आयकर विभाग की ओर से जारी नोटिस को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि धारा 148 के तहत दिए गए नोटिस से छह साल पहले ही संबंधित करदाता की मौत हो चुकी थी। इसके अलावा विभाग ने कर पुनर्निधारण के लिए मृतक के कानूनी वारिसों को कोई नोटिस नहीं दिया।
मृतका शोभा मेहता के कानूनी वारिस कन्हैयालाल मेहता ने आयकर विभाग के नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता महेन्द्र गार्गिया ने बताया कि आयकर विभाग ने वर्ष 2013-2014 के संबंध में आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत कर पुनर्निधारण का नोटिस शोभा मेहता के नाम दिया था। जबकि शोभा मेहता की नोटिस जारी करने से सालों पहले ही मौत हो चुकी थी। नियमानुसार विभाग को मृतक के कानूनी वारिस को तय मियाद में नोटिस देना जरूरी था। विभाग की ओर से कहा गया कि शोभा मेहता की मौत के बारे में जानकारी नहीं थी। शोभा मेहता के नाम जारी नोटिस उनके पति ने लिया था। उन्होंने शोभा की मौत की जानकारी दी थी। इसके बाद उनके कानूनी वारिसों को सूचना दी गई थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश संदीप मेहता और न्यायाधीश कुलदीप माथुर की खंडपीठ ने कर पुनर्निधारण नोटिस और कर निर्धारण आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि मामले में पूर्व में दायर एक अन्य याचिका के तथ्यों से साबित है कि आयकर उपायुक्त को संबंधित करदाता की मौत की जानकारी दी थी। ऐसे में विभाग की इस दलील को भी नहीं माना जा सकता कि उन्हें करदाता की मौत की जानकारी नहीं दी थी।
Published on:
26 Sept 2022 08:54 pm
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