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जयपुर।
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम द्वारा खरीदी जारी 876 नई बसों का मामला राजस्थान उच्च न्यायालय पहुंच गया है। एक अधिवक्ता ने जनहित याचिका दायर कर टेण्डर और भुगतान करने पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका पर आने वाले सप्ताह में सुनवाई होने की संभावना है। याचिका में राज्य के मुख्य सचिव, आरएसआरटीसी के चैयरमेन ओर एमडी और परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास को पक्षकार बनाया गया है।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता राजेन्द्र कुमार शर्मा ने जनहित याचिका दायर की है। जिसमें पथ परिवहन निगम द्वारा बीएस 4 मानक की बसों की खरीद पर सवाल खड़े किये है। याचिका में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल 2020 से बीएस मानक 6 के वाहन की खरीद को ही मान्यता दी है। ऐसे में देश में अप्रैल के बाद बीएस 4 के वाहनों की खरीद नहीं हो सकती। कभी भी उन्हे चलन से बाहर किया जा सकता है। इन बसों की खरीद के लिए विभाग के चैयरमेन और बोर्ड से एप्रूवल भी नहीं ली गई है। टेंडर प्रक्रिया में सभी नियमों की पूरी तरह से अवेहलना करते हुए बसों को खरीदा गया है। बी एस 4 मानक की इन बसो से ज्यादा यात्री निजी संचालकों द्वारा संचालित कि जा रही सामान्य बसों में यात्रा कर सकती है जिसकी वजह से पहले से नुकसान में चल रहे राजस्थान रोडवेज को ओर अधिक नुकसान होगा।
पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
राजस्थान पत्रिका ने आरएसआरटीसी चेयरमैन की ओर से बसों की खरीद मामले में की गई आपत्ति को उजागर किया था। बोर्ड चेयमरमैन ने टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए फिर से एक कमेटी बनाकर टेंडर प्रक्रिया फिर से जारी करने के निर्देश जारी किए थे। बसों की खरीद पर सवाल उठाने के बाद परिवहन मंत्री और चेयरमैन के बीच खींचतान की बात भी सामने आई है। पिछले दिनों रोडवेज मुख्यालय में नई बसों को हरी झंडी दिखाने के लिए आयोजित किए गए कार्यक्रम में भी चेयरमैन शामिल नहीं हुए थे।
Published on:
21 Feb 2020 05:10 pm
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