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बिना वकील और दलील के फाइल देखकर दी उच्च न्यायालय ने दी राहत

फ्लेट से बेदखली पर लगाई अंतरिम रोक

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जयपुर।

राजस्थान उच्च न्यायालय अतिआवश्यक मुकदमों की सुनवाई कर रहा है लेकिन वकीलों ने न्यायालय कार्रवाई पूरी तरह से रोकने की मांग कर रखी है और अदालतों में उपस्थित नहीं हो रहे हैं लेकिन न्यायालय में न्यायाधीश बिना वकील, दलील के फाइलों को देखकर राहत देने में जुटे हैं। ऐसे ही एक मामले में ऋण वसूली अधिकरण के आदेश पर रोक लगाते हुए फ्लेट से बेखदली करने पर अंतरिम रोक लगा दी। न्यायालय ने सभी पक्षों से इस मसले पर 24 अप्रेल तक जवाब मांगा है।

प्रिया बाहेती व अन्य ने ऋण वसूली अधिकरण के 27 अक्टूबर 2019 के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें प्रार्थियों को बेदखल कर बिल्डर द्वारा लिए गए लोन की वसूली का आदेश दिया था। प्रिया बाहेती की ओर से अधिवक्ता विकास सोमानी ने याचिका में कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने मार्च 2014 में आवासीय अपार्टमेंट में फ्लैट खरीदा था। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि बिल्डर ने अपार्टमेंट बनाने के लिए निजी फाइनेंस कंपनी से ऋण ले रखा है। वसूली अधिकरण ने वित्तीय संस्था की लोन राशि नहीं चुकाने पर फ्लैट धारकों को बेदखल कर लोन राशि की वसूली का आदेश जारी कर दिया। उन्होंने बिल्डर के खिलाफ आपराधिक शिकायत की और फ्लैट्स से बेदखली को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका पर उच्च न्यायालय में गुरूवार को अतिआवश्यक मामले के तौर पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुई लेकिन वकीलों के न्यायालय में अनुपस्थित रहने का फैसला किया था इस वजह से मामले की सुनवाई में कोई उपस्थित नहीं हुआ। जिस पर न्यायाधीश एसपी शर्मा ने फाइल व दस्तावेजों को देखकर फ्लेटधारकों को राहत दी और बेदखली पर अंतरिम रोक लगाते हुए सभी से 24 अप्रेल तक जवाब तलब किया है।