
Betel Leaf
एग्रो डेस्क
राजस्थान के आधा दर्जन से अधिक जिलों में पान की खेती पैर पसार रही है। करौली के मासलपुर के खेतों में उगे पान के पत्तों की अरब देशों तक मांग रहती है। भरतपुर, चितौड़गढ़, उदयपुर, बांसवाड़ा, पाली एवं झालावाड़ में भी किसान पान की खेती कर रहे हैं। इस खेती में मेहनत ज्यादा तो मुनाफा भी अच्छा मिलता है। पूजा-पाठ, हवन एवं खाने के काम आने से यह नकदी फसल है। जुताई के दौरान ही गोबर की भरपूर खाद डालें। इसके बाद कुछ दिन खेत को खाली छोड़ें। अधिक वर्षा वाला क्षेत्र जहां पर तापमान सामान्य रहता है, वहां पान की खेती आसानी से की जा सकती है। गर्म और तेज हवाओं से इसके पौधों को बचाना चाहिए। बरसात के मौसम में पान के पौधों का तेजी से विकास होता है। पान की खेती के लिए ऐसे खेत का चयन करना चाहिए, जहां पर जल भराव न हो।
बांस से बनाएं बरेजा
अधिकतर स्थानों पर पान की खेती के लिए बरेजा का निर्माण किया जाता है। बरेजा, छप्पर की तरह होता हैं। इसके निर्माण में बांस की लकड़ी एवं पुलाव सामग्री उपयोग में ली जाती है। एक मीटर की दूरी पर पंक्ति में बांस की लकड़ियों को लगा दिया जाता है। इन लकड़ियों पर ढाई से तीन मीटर की ऊंचाई पर पहले बांस की चपटियां एवं उसके बाद पुलाव बिछा देते हैं। और फिर इस पुलाव को बांस की चपटियों के साथ रस्सी से बांध देते हैं। इस तरह बरेजा तैयार हो जाता है। इससे पान की बेलों को फैलाव में मदद मिलती है।
जलवायु अनुसार चुनें किस्म
पान की कई किस्में हैं। जलवायु के अनुसार पान की किस्मों का चयन करना चाहिए। किस्म के अनुसार पत्तों का आकार एवं स्वाद भिन्न होता है। किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी एवं पानी को ध्यान में रखते हुए ही किस्मों का चयन करना चाहिए। इससे उत्पादन अच्छा होगा।
कलम विधि से रोपाई
पौधों की रोपाई कलम विधि से की जाती है। एक साल पुरानी पान की बेल की निचली डंडियों को काट कर कलमें तैयार की जाती हैं। बेल की दो-तीन गांठ मिट्टी में दबा देते हैं। शेष हिस्सा बाहर रखते हैं। रोपाई शाम के समय करने से बेलों के खराब होने की संभावनाएं कम रहती है।
यहां होती है खेती
राजस्थान के अलावा बिहार, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, असम, कर्नाटक, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश और पश्चिम बंगाल में भी पान की खेती होती है।
Updated on:
07 Jul 2022 10:23 am
Published on:
07 Jul 2022 09:41 am
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