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Rajasthan: राजस्थान में मानसून से पहले तैयारियों की उच्चस्तरीय बैठक, किरोड़ी लाल मीणा ने दिए 10 बड़े निर्देश

Monsoon Safety Meeting: मानसून से पहले राज्य सरकार ने बाढ़, जलभराव और अतिवृष्टि जैसी संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने सभी विभागों को समन्वय के साथ अग्रिम तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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Monsoon Safety Meeting

अधिकारियों संग बैठक करते मंत्री किरोड़ी लाल मीणा। फोटो- पत्रिका

जयपुर। आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि आगामी मानसून के दृष्टिगत प्रदेश में संभावित बाढ़, अतिवृष्टि, जलभराव एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभाग व्यापक और समन्वित तैयारियां सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और संभावित आपदा की स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए अभी से पूर्ण तैयारी रखी जाए।

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शासन सचिवालय के सभागार में गुरुवार को आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि पिछले साल के अनुभवों एवं संवेदनशील क्षेत्रों के आकलन के आधार पर बाढ़ संभावित और जलभराव वाले क्षेत्रों की पुनः पहचान की जाए तथा वहां आवश्यक संसाधनों की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

1-आपदा नियंत्रण कक्ष 15 जून से चौबीसों घंटे सक्रिय रहें

उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में पूर्व तैयारी, समयबद्ध चेतावनी, त्वरित प्रतिक्रिया तथा प्रभावी समन्वय सफलता का आधार है। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य एवं जिला स्तर पर स्थापित आपदा नियंत्रण कक्ष 15 जून से चौबीसों घंटे सक्रिय रहें। राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष, जिला नियंत्रण कक्ष तथा विभागीय नियंत्रण कक्षों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए और सभी सूचनाएं समय पर राज्य नियंत्रण कक्ष को भेजी जाएं। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों एवं एडवाइजरी की पूर्ण पालना सुनिश्चित की जाए।

2-चेतावनी अलर्ट से अपडेट रहने के निर्देश

आपदा प्रबंधन मंत्री ने कहा कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की ओर से 24 घंटे संचालित वेधशालाओं एवं मौसम निगरानी तंत्र के माध्यम से नियमित मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियां जारी की जा रही हैं। मौसम संबंधी जानकारी के त्वरित प्रसार के लिए सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, एसएमएस, व्हाट्सएप समूहों तथा अन्य संचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों को सचेत ऐप डाउनलोड कर चेतावनी अलर्ट से अपडेट रहने के निर्देश दिए।

3-वेदर वॉच ग्रुप का गठन

उन्होंने कहा कि मानसून की नियमित निगरानी के लिए वेदर वॉच ग्रुप का गठन किया गया है, जो नियमित बैठकों के माध्यम से वर्षा की स्थिति, संभावित जोखिमों तथा आवश्यक तैयारियों की समीक्षा करेगा। राज्य एवं जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन तंत्र, मौसम विभाग, जल संसाधन विभाग तथा जिला प्रशासन के बीच सतत समन्वय बनाए रखा जाएगा।

डॉ. मीणा ने जल संसाधन विभाग को सभी बांधों, जलाशयों एवं एनीकटों के गेटों की मरम्मत, रखरखाव और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए प्रभावी अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने, बाढ़ संभावित क्षेत्रों का जोखिम मूल्यांकन करने तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

4-त्रिस्तरीय तैयारी सुनिश्चित की जाए

उन्होंने नगरीय विकास विभाग, स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं को नालों की सफाई, ड्रेनेज तंत्र को सुचारू बनाने, जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान करने तथा डी-वाटरिंग के लिए पर्याप्त पम्पसेट, जनरेटर, रेत की बोरियां एवं अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उचित ड्रेनेज व्यवस्था के माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या को न्यूनतम किया जाए।

डॉ. मीणा ने कहा कि बाढ़ प्रबंधन के लिए त्रिस्तरीय तैयारी सुनिश्चित की जाए। इसमें बाढ़ से पूर्व की तैयारी, बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव कार्य तथा बाढ़ के पश्चात पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की कार्ययोजना शामिल हो। जिला कलक्टर बाढ़ संहिता के अनुसार सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें।.

5-सुरक्षा एजेंसियों को पूर्ण सतर्कता के निर्देश

उन्होंने राजस्थान आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), सेना, वायुसेना, पुलिस, सिविल डिफेंस, होमगार्ड तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों को पूर्ण सतर्कता बनाए रखने और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। विशेष बचाव दलों एवं क्विक रिस्पॉन्स टीमों की तैनाती कर आवश्यक उपकरणों, नौकाओं, लाइफ जैकेट, रस्सियों एवं अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

6-24×7 नियंत्रण कक्ष संचालित हो

बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को 24×7 नियंत्रण कक्ष संचालित करने, पर्याप्त दवाइयों एवं जीवनरक्षक औषधियों का भंडारण रखने तथा मोबाइल मेडिकल टीमों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही जलजनित एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए विशेष निगरानी रखने को कहा गया। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को सुरक्षित पेयजल आपूर्ति, क्लोरीनेशन तथा क्षतिग्रस्त जलापूर्ति लाइनों की त्वरित मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

7-विद्युत आपूर्ति व्यवस्था सुचारू रहे

ऊर्जा विभाग को विद्युत आपूर्ति व्यवस्था सुचारू बनाए रखने, क्षतिग्रस्त लाइनों एवं ट्रांसफार्मरों की त्वरित मरम्मत तथा राहत शिविरों में निर्बाध विद्युत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। जिलों में उपलब्ध हेवी ड्यूटी जनरेटर सेट्स का डेटाबेस तैयार कर आवश्यकता पड़ने पर उनका उपयोग सुनिश्चित करने को कहा गया।

8-जर्जर भवनों की पहचान करें

उन्होंने सार्वजनिक निर्माण विभाग को जर्जर भवनों की पहचान करने, रेलवे अंडरपास एवं संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों में चेतावनी संकेतक लगाने तथा क्षतिग्रस्त सार्वजनिक परिसंपत्तियों के त्वरित पुनर्स्थापन की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। सभी विभागों को अपने क्षेत्राधिकार में जर्जर भवनों एवं जोखिम वाले स्थलों का सर्वेक्षण कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

9-पशुपालन-मत्स्य विभाग के लिए निर्देश

पशुपालन विभाग को पशुओं के लिए चारा, दवाइयों एवं टीकाकरण की पर्याप्त व्यवस्था रखने तथा पशुपालकों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए। वहीं, मत्स्य विभाग को मछुआरों, तैराकों एवं विशेषज्ञ गोताखोरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों के लिए आवश्यक खाद्यान्न एवं अन्य जरूरी वस्तुओं का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

10-विभागवार तैयारियों की समीक्षा

डॉ. मीणा ने जिला कलक्टरों को राहत शिविरों, निकासी मार्गों, सुरक्षित आश्रय स्थलों, खोज एवं बचाव दलों तथा उपलब्ध संसाधनों का पूर्व परीक्षण करने के निर्देश दिए। जलभराव एवं बाढ़ संभावित क्षेत्रों की मैपिंग, राहत शिविरों का चिन्हीकरण तथा मॉक ड्रिल आयोजित कर तैयारियों की समीक्षा करने को कहा। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों की बैठकें आयोजित कर विभागवार तैयारियों की समीक्षा करने तथा ग्राम स्तर तक चेतावनी एवं सूचना तंत्र को सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए।

वहीं, आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य आपदा आने पर राहत पहुंचाने के साथ-साथ पूर्व चेतावनी एवं समयबद्ध तैयारी के माध्यम से जनहानि और संपत्ति की क्षति को न्यूनतम करना है। उन्होंने कहा कि 15 जून से राज्य एवं जिला आपदा नियंत्रण कक्ष 24×7 सक्रिय रहेंगे तथा हेल्पलाइन सेवाएं भी पूर्ण रूप से कार्यशील रहेंगी। मौसम विभाग, जल संसाधन विभाग, जिला प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन तंत्र के बीच सतत समन्वय स्थापित कर संभावित अतिवृष्टि, जलभराव एवं बाढ़ की परिस्थितियों पर निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।