
हाईवे निर्माण के लिए पेड़ो की बलि (फाइल फोटो)
-उदयपुर को गुजरात से जोडऩे वाले राष्ट्रीय राज मार्ग संख्या 58-ई का मामला
-एनएचएआई पुन: पेड़ लगाने के लिए वन विभाग को देगा 17.30 करोड़
जयपुर/उदयपुर। करीब 50 पहाड़ और 60 हजार हरे-भरे पेड़ जिले के जनजाति क्षेत्र को गुजरात के जनजाति क्षेत्र से जोडऩे वाले राष्ट्रीय राज मार्ग संख्या 58-ई की भेंट चढ़ेंगे। इस पर्यावरण असंतुलन से बचने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राज्यमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) पुन: पेड़ लगाकर उन्हें विकसित करने के लिए वन विभाग को 17 करोड़ 30 लाख रुपए देगा।
उदयपुर जिले के सेठजी की कुंडाल से गुजरात की अम्बावेली तक 91 किमी लम्बे हाईवेनिर्माण के लिए 60 हजार से अधिक पेड़ों की बलि चढ़ेगी, जिनमें से करीब साढ़े चार हजार पेड़ खातेदारी जमीन से काटे जाएंगे। यह हाईवे का 18.88 किमी लम्बा हिस्सा वन भूमि से गुजरेगा। इसकी जद में विभाग की करीब 79.47 हेक्टेयर जमीन आ रही है। एेसे में वन विभाग की मंजूरी के लिए पिछले चार वर्ष से काम अटका हुआ था। अब जाकर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने हाईवे को हरी झंडी दी है।
नोरा, उन्दरी घाटा, पई घाटा, पालिया खेड़ा, सांड़ोल माता, बारी घाटा, जोटाणा, ढीकलिया, कीरट, लुनियारा, घोड़ीमारी, तुंदर, भामटी एवं गरणवास के वन क्षेत्र में सड़क सीमा में करीब साढ़े 15 हजार बड़े पेड़ों के अलावा करीब 45 हजार छोटे हरे पेड़ धराशायी किए जाएंगे। इसी प्रकार उन्दरी, पई का घाटा, बारी घाटा, सांडोल माता व पालिया खेड़ा में हाइवे की जद में आ रहे पहाड़ काटकर मैदान बन जाएंगे। ढाई से तीन किमी की लम्बाई में पहाड़ों का खत्मा होगा।
होगा नया वन विकसित
हजारों पेड़ों की भरपाई के लिए नेशनल हाईवे सार्वजनिक निर्माण विभाग 17 करोड़ 30 लाख रुपए अगले 2-3 दिन में वन विभाग को देगा। हाईवे के लिए नीम, आम, खजूर, महुआ, बबूल, करंज, खाखरा, नीलगिरी, बांस समेत कई औषधीय पेड़ों का खात्मा हो जाएगा।
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58-ई हाईवे निर्माण के दौरान वन विभाग की करीब 17.41 हेक्टेयर भूमि में करीब साढ़े पन्द्रह हजार पेड़ कटेंगे। छोटे-मोटे करीब 60 हजार पेड़ों की कटाई होगी। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने वन भूमि से सड़क निकालने को मंजूरी दे दी है।
-राहुल पंवार, सहायक अभियंता नेशनल हाइवे, उदयपुर
Published on:
23 Jul 2019 01:22 am
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