जयपुर. खबरें किसी भी माध्यम से आए, आज भी उनमें डूबे बिना लोगों की शाम नहीं होती, ये और बात हैं कि पहले जितना ऐतबार खबरों पर हुआ करता था, वो नहीं रहा, इसकी एक वजह यह भी है कि खबरें लगातार आती रहती हैं, किसे याद करें, किसे भूल जाएं, ये तय करना मुश्किल हो गया है। फिर भी खबरें तो जाननी होती हंै, पर न जाने कितने फिल्टर से छनकर आती हैं ये।