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अपनी कला से प्रदेश को एक खास पहचान दिलाने वाले पद्मश्री कलाकार सरकार से क्यों हैं नाराज, ऐसे जताई अपनी पीड़ा

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जयपुर

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Pushpendra Singh Shekhawat

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Updated: 3 Aug 2018, 9:31 PM IST

jaipur

अपनी कला से प्रदेश को एक खास पहचान दिलाने वाले पद्मश्री कलाकार सरकार से क्यों हैं नाराज, ऐसे जताई अपनी पीड़ा

अनुराग त्रिवेदी / जयपुर. प्रदेश की कला को एक खास पहचान दिलाने वाले प्रदेश के सात पद्मश्री कलाकारों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठा रहे है। जवाहर कला केन्द्र में शुक्रवार को पद्मश्री से सम्मानित मूर्तिकार अर्जुन प्रजापति, मिनिएचर कलाकार शाकिर अली, सेरेमिक विधा के स्वप्न गुहा, कालबेलिया डांसर गुलाबो सपेरा, चित्रकार तिलक गिताई, ब्लॉक प्रिंटिंग के रामकिशोर छीपा, सारंगी वादक मोइनुद्दीन खान ने पत्रकारों को अपनी समस्याओं से रूबरू करवाया।

अर्जुन प्रजापति ने कहा कि पिछले कुछ सालों में पद्मश्री से सम्मानित कलाकारों को राजकीय कार्यक्रमों में बुलावा तक भिजवाना बंद कर दिया गया है। जवाहर कला केन्द्र और राजस्थान ललित कला अकादमी जैसी सरकारी संस्थाओं के कार्यक्रमों में न आमंत्रित किया जाता है और ना ही इनके आयोजन गतिविधियों की समितियों में शामिल किया जाता है।

स्वप्न गुहा ने कहा कि पद्मश्री कलाकारों को सरकार की तरफ से कला साधना और कला के प्रचार-प्रसार के लिए जगह नहीं मिल रही है, जिसके चलते हमारी विधा में नए कलाकारों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। शाकिर अली ने कहा कि न ही कलाकारों को पेंशन मिल रही है और ना ही स्थानीय कलाकारों की कृतियों को सही जगह नहीं मिल रही है।

सरकार ने रोका कालबेलिया स्कूल का सपना

गुलाबो सपेरा ने कहा कि सरकार ने मेरे लिए कालबेलिया स्कूल की घोषणा की थी, लेकिन वह सिर्फ फाइलों में दब कर रह गई। जयपुर में जगह अलॉट हुई, लेकिन उसे जवाहर कला केन्द्र को दे दिया गया। जब मैंने सरकार से पुष्कर में कालबेलिया स्कूल खोलने के लिए प्रस्ताव दिया तो, यह प्रस्ताव अपू्रव तो हुआ, लेकिन आज तक किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मिली। हमें हमारी कलाओं को ही आगे बढ़ाने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। रामकिशोर छीपा ने कहा कि हमें भारत सरकार से इतना बड़ा सम्मान मिला है, लेकिन विडम्बना यह है कि राजस्थान में हमें साबित करना पड़ता है कि हम पद्मश्री से सम्मानित है। तिलक गिताई ने कहा कि पहले भी पद्मश्री कलाकारों को म्यूजियम, आर्ट गैलेरी और आर्ट स्टूडियो के लिए सरकारी सहायता से जगह मिलती रही है, लेकिन अब यह नहीं हो पा रहा है।