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जयपुर में दिखी सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल, मुस्लिमों ने किया गणेश चतुर्थी की शोभायात्रा का शानदार स्वागत

( Ganesh Chaturthi 2019 ) गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल ( hindu muslim unity news ) पेश करते हुए मजीद पठान, हाजी इस्माइल पवार, सोहेल मंसूरी, इकबाल मंसूरी, युसूफ मंसूरी, रफीक पवार और समाज के अन्य गणमान्य लोगों ने आमेर सागर रोड स्थित 17वीं शताब्दी में निर्मित श्वेत अर्क पौधे की जड़ से बने आंकड़े के गणेश जी का फूल मालाएं पहनाकर स्वागत ( brotherhood in hindu muslim ) किया।

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जयपुर

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Abdul Bari

Sep 03, 2019

जयपुर में दिखी सांप्रदायिक सौहार्द्र की अनूठी मिसाल, मुस्लिमों ने किया गणेश चतुर्थी की शोभायात्रा का शानदार स्वागत

जयपुर में दिखी सांप्रदायिक सौहार्द्र की अनूठी मिसाल, मुस्लिमों ने किया गणेश चतुर्थी की शोभायात्रा का शानदार स्वागत

जयपुर
गणेश चतुर्थी ( Ganesh Chaturthi 2019 ) पर प्रदेशभर में प्रथम पूज्य के स्वागत का ज़ोर रहा। जयपुर में भी आमेर स्थित आंकड़े के गणेश जी मंदिर पर गणेश चतुर्थी त्योहार धूमधाम से मनाया गया। यहां भगवान श्री गणेश की यात्रा शाही लावाजमे के साथ निकाली गई। इस दौरान खास बात ये रही कि शोभा यात्रा का मुस्लिम समुदाय द्वारा शानदार स्वागत किया गया। गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल ( hindu muslim unity news ) पेश करते हुए मजीद पठान, हाजी इस्माइल पवार, सोहेल मंसूरी, इकबाल मंसूरी, युसूफ मंसूरी, रफीक पवार और समाज के अन्य गणमान्य लोगों ने आमेर सागर रोड स्थित 17वीं शताब्दी में निर्मित श्वेत अर्क पौधे की जड़ से बने आंकड़े के गणेश जी का फूल मालाएं पहनाकर स्वागत ( brotherhood in hindu muslim ) किया।


गौरतलब है की रक्षा बंधन और बकरीद के समय समुदाय विशेष के लोगों में कांवड़ियों से हुई कहासुनी के बाद दिल्ली रोड पर और प्रदेश के कुछ अन्य जिलों में भी छिटपुट घटनाएं होने से प्रदेश में शान्ति व्यवस्था बिगड़ गयी थी। लेकिन प्रदेश की गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल पेश करते हुए आमेर में मुस्लिम समुदाय ने भी प्रथम पूज्य को अगले साल पुनः लौट कर आने का आग्रह किया।

प्रतिमा के बारे में ऐसी है मान्यता

इस मंदिर में रखी प्रतिमा के बारे में ऐसी मान्यता है कि जब श्वेत अर्क पौधा 100 वर्ष पूरे कर लेता है तो इसकी जड़ में स्वतः ही भगवान श्री गणेश की आकृति निर्मित हो जाती है। मंदिर में दो मूर्ति स्थापित हैं एक आंकड़े से निर्मित श्री गणेश की है और एक मार्बल से बनाई गई प्रतिमा भी विराजमान है। इस मंदिर और प्रतिमा की स्थापना महाराजा माधव सिंह की पत्नी द्वारा कुरुक्षेत्र हरियाणा से लाकर मंदिर में 17 वीं शताब्दी में स्थापित की गई थी। मंदिर की मान्यता को देखते हुए प्रति बुधवार लगभग दो से ढाई हजार श्रद्धालु दर्शन को आते हैं। रवि पुष्प नक्षत्र व गुरु पुष्प नक्षत्र को श्रद्धालुओं का एक विशेष सैलाब ( Ganesh Chaturthi Special) देखने को मिलता है।