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कभी रामगंज में सुनाई देती थी तोपों की गर्जना, कोरोना के कारण इन दिनों है चर्चित

कोरोने की वजह से चर्चित रामगंज को सवाई जयसिंह ने चार चौकड़ियों में शामिल कर बेहतरीन ढंग से बसाया था। युद्ध में विजय दिलाने वाली मां महाकाली का प्रतीक मानकर रामगंज चौपड़ स्थापित की गई। घाटगेट, तोपखाना हुजूरी, रामचंद्र जी और गंगापोल चौकड़ी से जुड़े इलाके में मुसलमान और हिंदू योद्धाओं को बसाकर घाटगेट में तोपखाना और सैनिक छावनी कायम की गई...

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जयपुर

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Dinesh Saini

Apr 17, 2020

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— जितेंद्र सिंह शेखावत
जयपुर। कोरोने की वजह से चर्चित रामगंज को सवाई जयसिंह ने चार चौकड़ियों में शामिल कर बेहतरीन ढंग से बसाया था। युद्ध में विजय दिलाने वाली मां महाकाली का प्रतीक मानकर रामगंज चौपड़ स्थापित की गई। घाटगेट, तोपखाना हुजूरी, रामचंद्र जी और गंगापोल चौकड़ी से जुड़े इलाके में मुसलमान और हिंदू योद्धाओं को बसाकर घाटगेट में तोपखाना और सैनिक छावनी कायम की गई। कभी रामगंज में तोपों की गर्जना सुनाई देती थी। सवाई रामसिंह के समय प्रधानमंत्री फैज अली खान ने रामगंज चौपड़ का जीर्णोद्धार करवाया। गंगापोल चौकड़ी में युद्ध में वीरता दिखाने वाले सामंतों को बसाया गया। घाटगेट और तोपखाना हुजूरी में मुसलमान सैनिकों की हवेलियां बनी। तोपखाना का रास्ता में अफगानिस्तान से आमेर आए तोप बनाने वाले कारीगरों को बसाया। इनकी तोपों ने जयपुर पर हमला करने वाले दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे।

घोड़ा निकास रोड पर पुराना तबेला रहा। यहां सैनिकों के घोड़ों की टाप सुनाई देती थी। युद्ध और शाही जुलूसों की शान हाथियों के लिए महावतों का मोहल्ला भी यहां की शान रहा। एक महावत को जयपुर रियासत का मंत्री भी बनाया गया था। जगन्नाथ शाह के रास्ते में चीता पालकों के घरों में चीते पलते और राजाओं के साथ शिकार पर जाने वाले शिकारियों का मोहल्ला और हिंसक शेरों को जिंदा पकड़ने वालों के नाहरवाड़ा में कभी हिंसक शेर रहते।

हिंदू मुसलमानों में प्रेम की गांठों को मजबूत बनाने वाले पतंगबाज और आतिशबाज जयपुर की शान है। फौजदार और सिपाहियों की वीरता के किस्से आज भी यहां के लोगों की यादों में बसे हैं। पोलों की स्टिक बनाने का काम हो या फिर कमान, तलवार आदि बनाने की कला में लोहारों ने ऊंचा काम किया। संगीत को ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले ध्रुपद गायक बाबा बहराम खां डागर तो गुणीजन खाने की शान थे।

रामगंज चौपड़ पर गौहर जान की हवेली में संगीत की महफिल सजती थी। यह नृत्यांगना राज की महफिलों को सजाया करती थी। सारंगी वादक कानजी और भोला तबले वालों की गली आज भी मशहूर है। कल्लू कव्वाल के अलावा फिल्मों में हसरत जयपुरी, शमीम जयपुरी, शायर अंजुम और पारस ने रामगंज का नाम दुनिया में ऊंचा किया। रथखाना, फीलखाना, शतुरखाना के सैनिकों ने सेना का मान बढ़ाया। फूटा खुर्रा में कमान बनाने वाले रहे। रेगरों की कोठी में बनी जूतियां राजा और रईस पहनते। मन्नू खां और महबूब खान अंतिम फौजदार रहे।

महाराजा कॉलेज और सेंट जेवियर स्कूल के ठेकेदार जमरूद्दीन रामगंज के थे। इतिहास के जानकार देवेंद्र भगत के मुताबिक 1961 की गणना के मुताबिक रामगंज की चारों चौकड़ियों की आबादी 1,29,566 थी। इसके तहत तोपखाना में 27,348 और घाटगेट में 43,900 लोग रहते थे।